इंदिरा अम्मा भोजनालय की योजना सरकार की उपलब्धि में शुमार है, लेकिन यह योजना चंपावत जिले में फ्लाप होती दिख रही है। लोक-लुभावनी इस सरकारी योजना का लाभ चाहे जिसे मिले, मगर घाटा इस योजना को चलाने वालों को हो रहा है। औसतन रोजाना 807 रुपये का घाटा संचालक को उठाना पड़ रहा है। अगर हाल ऐसा ही रहा, तो यहां इस योजना के भविष्य पर भी तलवार लटक सकती है।
इंदिरा गांधी की जयंती 19 नवंबर 2015 से शुरू इंदिरा अम्मा भोजनालय को तीन माह से अधिक हो चुके हैं। आकाश छूती महंगाई के दौर में सिर्फ 25 रुपये में भोजन की थाली मिलने से लोगों को तो राहत मिली, मगर भोजनालय चलाने वालों के लिए चुनौती आसान नहीं है। इन तीन महीनों में 81 दिनों चले भोजनालय में 7041 लोगों ने भोजन किया। रविवार को भोजनालय बंद रहता है। इससे मिलने वाली कुल रकम से अधिक खर्चा तो भोजनालय में लगे लोगों पर खर्च हो रहा है।
भोजनालय के संचालक गिरधर सिंह फर्त्याल का कहना है कि 7041 थाली से 176025 रुपये मिले। इसमें प्रति थाली दस रुपये के हिसाब से 70410 रुपये सब्सिडी मिलेगी। इस तरह ये रकम कुल मिलाकर 246435 रुपये हो गई, मगर खर्च 311870 रुपये आ रहा है। इसमें 93170 रुपये भोजन सामग्री, 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 11 महिलाएं और 500 रुपये रोजाना की दर से एक संचालक का खर्च शामिल हैं।
जरूरी है 168 थाली की बिक्री
इंदिरा अम्मा भोजनालय चंपावत मोटर स्टेशन में खुलने के बावजूद यहां भोजन करने वालों की संख्या बढ़ नहीं रही है। किसी भी दिन 150 से अधिक लोगों ने भोजन नहीं किया, जबकि भोजनालय को घाटे से बचाने के लिए औसतन 168 थाली रोजाना की बिक्री जरूरी है, जबकि बिक्री रोजाना औसतन 87 थाली की है। कम कीमत और पहाड़ी व्यंजनों के बावजूद कम बिक्री की वजह भोजनालय का सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक खुलना भी बड़ी वजह है।
होटल कारोबारियों पर नहीं पड़ा असर
इंदिरा अम्मा भोजनालय की सस्ती थाली से लोगों को भले ही राहत हो, मगर होटल कारोबारियों को खास असर नहीं पड़ा है। सक्टा भोजनालय के अमरनाथ सक्टा सहित कई होटल कारोबारियों का कहना है कि इंदिरा अम्मा भोजनालय से उनकी बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। खुले बाजार में भोजन की थाली 40 रुपये से शुरू है।
इंदिरा अम्मा भोजनालय की सब्सिडी के लिए शासन से 4.80 रुपये प्राप्त हुए हैं, मगर भोजनालय की ओर से डिमांड काफी कम की है। सब्सिडी के बिल कोषागार भेजे गए हैं। जल्द ही सब्सिडी भोजनालय के संचालक को भेज दी जाएगी।
-केएन तिवारी, सहायक परियोजना निदेशक, डीआरडीए, चंपावत।
इंदिरा अम्मा भोजनालय में पूर्ति विभाग ने 6 क्विंटल चावल और एक क्विंटल आटा निशुल्क दिया था। अलबत्ता अभी सब्सिडी नहीं मिली है, मगर सब्सिडी के बावजूद भोजनालय में घाटा हो रहा है। औसतन रोजाना 807 रुपये का घाटा हो रहा है। इस घाटे को कम करने के लिए संचालक को रोज के बजाय हफ्ते में एक दिन की ड्यूटी देने का प्रस्ताव है। फिर भी घाटा बंद नहीं हुआ, तो भोजनालय के संचालन पर विचार किया जाएगा। -गिरधर सिंह फर्त्याल, संचालक, इंदिरा अम्मा भोजनालय, चंपावत