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शिक्षा की गुणवत्ता के लिए  बजट बढ़ाएं

Wed, 19 Jun 2019 10:36 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो  चंपावत।
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केंद्र सरकार के नई शिक्षा के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर चंपावत में र्चा करते खंड शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट और अन्य शिक्षाविद। - फोटो : अमर उजाला
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 क्षेत्र के शिक्षाविदों ने शिक्षा के विस्तार के लिए बजट बढ़ाने का सुझाव दिया। यहां ब्लाक संसाधन केंद्र सभागार में शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप की सिफारिशों पर चर्चा की गई। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तीन प्रतिशत राशि को शिक्षा के लिए नाकाफी बताते हुए इसे छह प्रतिशत तक करने का सुझाव दिया। साथ ही कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिल्टी  (सीएसआर) की 80 फीसदी राशि शिक्षा में खर्च करने की बात कही गई। परिचर्चा के सुझावों को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा गया है। 
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खंड शिक्षाधिकारी अंशुल बिष्ट की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षक नवीन पंत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप की सिफारिशों की जानकारी दी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम को पहली कक्षा के बजाय पूर्व प्राथमिक कक्षाओं से इंटर तक लागू करने, त्रिभाषा सूत्र, बेसिक शिक्षा में 30 छात्रों पर एक शिक्षक की तैनाती आदि को इस  प्रारूप में शामिल किया गया है। बैठक में एक कक्षा के लिए अनिवार्य रूप से न्यूनतम एक शिक्षक की तैनाती, स्कूली पाठ्यक्रम को चिकित्सकीय, इंजीनियरिंग और अन्य व्यवसायों के अनुरूप तैयार करने, गणित, विज्ञान व साहित्य का देशभर में एक समान पाठ्यक्रम सहित कई सुझाव दिए गए। 

बताया कि 2022 तक शिक्षा मित्र व्यवस्था समाप्त होने की संभावना है। सेवानिवृत्त एबीएसए लोकमणि पंत, एबीसी अल्मामैटर पब्लिक स्कूल के प्रबंधक मदन महर, उदयन इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन पांडेय मनोज जोशी, नीरज पांडेय आदि ने सुझाव रखे। परिचर्चा में मोहन जोशी, कमलेश जोशी, अर्जुन सिंह, भुवन जोशी, गौरव सिंह, योगेश समदरिया, राजेंद्र गहतोड़ी, नवीन उपाध्याय, कमल शर्मा, देवीदत्त जोशी आदि मौजूद थे। 
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