बालातड़ी ग्राम पंचायत के रोड से कटे इलाकों को जोड़ने के लिए स्वीकृत एक मोटर मार्ग सात वर्षों में एक इंच आगे नहीं बढ़ सका है। अब भी यह पत्रावली वन अनापत्ति का इंतजार कर रही है। इसे लेकर गांव के लोगों की ओर से लगातार आवाज उठाई जा रही है पर अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
टाक खंदक से बालातड़ी होते हुए अमौली गांव तक की 12.6 किलोमीटर लंबे रोड का प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2008 में सर्वे किया गया था, मगर तबसे इस रोड के काम में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा जा सका है। चंपावत डिवीजन के तहत सर्वे हुआ और बाद में इस रोड का जिम्मा नए खुले लोहाघाट डिवीजन को दे दिया गया। बालातड़ी के ग्राम प्रधान हरीश चंद्र भट्ट का कहना है कि रोड के बनने से इन गांवों की एक हजार से अधिक की आबादी को न केवल पैदल चलने से निजात मिलेगी, बल्कि इलाके के विकास और किसानों की उपज को मंडी तक पहुंचाना मुमकिन होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भी भेजा है।
उधर, लोहाघाट पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता प्रतीक सिंह का कहना है कि इस सड़क से वन अनापत्ति को दूर करने की कवायद चल रही है। फिलहाल यह फाइल डीएफओ स्तर पर है। वन अनापत्ति दूर होने पर सड़क का कार्य किया जा सकेगा।