नगर में पेयजल के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है। नगर के कई मोहल्लों में लोग पांच दिनों से पानी के लिए तरसे हुए हैं। बनस्वाड़ पेयजल योजना के पाइप कुछ असामाजिक तत्वों के तोड़ दिए जाने से यह स्थिति पैदा हुई है। पिछले पांच माह से बारिश न होने के कारण बनस्वाड़ पेयजल योजना से दो लाख लीटर के स्थान पर केवल 25 हजार लीटर पानी मिल रहा है। यहां की पेयजल लाइन छह इंच मोटी होने एवं पानी का स्तर कम होने से एयर प्रेशर के कारण भी दिक्कतें पैदा हो रही हैं। नगर में वैसे भी हर तीसरे दिन पेयजल वितरण व्यवस्था किए जाने से लोग बेहद गुस्से में हैं।
चेयरमैन लता वर्मा का कहना है कि बरसाती मौसम में भी तीसरे दिन पानी दिए जाने का कोई तुक नहीं था। उनका कहना है कि जल स्तर में कमी आ गई है तो टैंकरों के जरिए लोगों की प्यास बुझाई जाए। वर्तमान में हैंडपंप ही लोगों का सहारा बने हैं, लेकिन अधिकांश हैंडपंपों के पानी में आयरन की मात्रा अधिक होने से लाल रंग का पानी निकल रहा है। सुबह से ही नर्सरी गधेरे में पानी भरने वालों की कतार शुरू हो जाती है। कई घरों के बच्चे भी पानी ढोने में लगे हुए हैं।
सूखे के कारण गहराने लगा संकट
जल संस्थान के अभियंता विशाल सक्सेना का कहना है कि सूखे के कारण पेयजल संकट गहराने लगा है। वर्तमान में साढ़े 16 लाख लीटर पानी की आवश्यकता के विपरीत जल संस्थान को केवल चार लाख लीटर चौड़ी पंप से, 20 हजार लीटर फोर्ती से, 25 हजार बनस्वाड़ से, 35 हजार नलकूप से यानि 4.80 लाख लीटर पानी की ही आपूर्ति हो रही है, जिससे जल संकट गहराता जा रहा है।
नहीं मिली लिफ्ट योजना की डीपीआर को मंजूरी
नगर की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए पिछले 10 वर्षों से सरयू से लिफ्ट पेयजल योजना बनाने की बातें चल रही हैं। वर्ष 2006 से योजना का सर्वे शुरू किया गया था, जो आठ साल तक चलता रहा। उसके बावजूद अब तक योजना की 43.95 करोड़ रुपये की डीपीआर को स्वीकृति नहीं मिली है।
एबटमाउंट के 45 परिवार भी पानी को तरसे
सुरम्य पहाड़ी एबटमाउंट के चारों ओर रहने वाले स्थानीय 45 परिवार भी पानी के लिए तरसे हुए हैं। यहां के लोग आधा किमी दूर नौलों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। यहां लगे हैंडपंपों का पानी इतना लाल है कि उसका कोई उपयोग ही नहीं करता है। शाहनवाज, जावेद, लक्ष्मी दत्त, रमेश चंद्र, केशव दत्त, दिनेश नाथ, हरीश चंद्र, मोती राम, सलीम जावेद आदि का कहना है कि ऊंचाई में होने के कारण यहां पानी आना संभव नहीं है, जिसके लिए जल संस्थान को टैंकरों से रोज पानी की आपूर्ति करनी चाहिए।