स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाता है। बात अगर चंपावत जिले की करें तो स्वामी विवेकानंद के चरण यहां आज से 117 साल पहले पड़े थे। तब उन्होंने लोहाघाट के समीप स्थित मायावती आश्रम में 14 दिनों तक प्रवास किया था। इसके अलावा चंपावत और दियूरी में स्थित जिला पंचायत के डाक बंगलों में भी एक-एक रात बिताई थी। 18 जनवरी 1901 को बैलूर मठ जाते हुए स्वामी जी चंपावत में रुके थे। वर्तमान में संचालित दूरदर्शन केंद्र परिसर में स्थित जिला पंचायत के डाक बंगले में उन्होंने आध्यात्मिक सतसंग और प्रवचन किया था।
चंपावत जिले से स्वामी विवेकानंद से जुड़ी यादों को रामकृष्ण मिशन की ओर से प्रकाशित पुस्तक युगनायक विवेकानंद भाग तीन में हिमालय की अंतिम यात्रा के तौर पर प्रकाशित किया गया है। जिसके अनुसार 28 अक्टूबर 1900 को स्वामी जी के परम शिष्य और अद्वैत आश्रम मायावती के संस्थापक ब्रिटिश कैप्टन सेवियर का देहावसान हो गया था। उस समय स्वामी जी पेरिस की यात्रा में थे। स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने मिसेज सेवियर को सांत्वना देने के लिए मायावती आश्रम जाने का निर्णय लिया। वह कोलकाता से चल 29 दिसंबर 1900 को रेल से काठगोदाम पहुंचे। उसके बाद वह काठगोदाम से धारी, पहाड़पानी, मोरनौला, धूनाघाट होते हुए तीन जनवरी को मायावती आश्रम पहुंचे। जहां पर स्वामी जी ने 17 जनवरी 1901 तक प्रवास किया। उनकी वापसी की यात्रा 18 जनवरी को शुरू हुई और मायावती से पैदल चल कर वह चंपावत पहुंचे और रात्रि विश्राम किया। अगले दिन यहां से उनका काफिला दियूरी पहुंचा तथा दूसरे दिन श्यामलाताल होते हुए टनकपुर की ओर रवाना हुआ।
मायावती में है प्रबुद्ध भारत का संपादकीय कार्यालय
चंपावत। लोहाघाट के मायावती आश्रम में अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका प्रबुद्ध भारत का संपादकीय कार्यालय स्थित है। प्रबुद्ध भारत का प्रकाशन वर्ष 1896 से किया जा रहा है। पत्रिका में धर्म, कला, विज्ञान, दर्शनशास्त्र से संबंधित लेख आदि प्रकाशित किए जाते हैं। पूर्व में पत्रिका का प्रकाशन भी मायावती में होता था। वर्तमान में पत्रिका का प्रकाशन बेलूर मठ कोलकाता से किया जाता है, लेकिन संपादकीय कार्य आज भी मायावती कार्यालय से ही किए जाते हैं।
देश विदेश से आश्रम पहुंचते रहते हैं अनुयायी
चंपावत। मायावती आश्रम में स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों का देश विदेश से आवागमन लगातार जारी रहता है। आज भी अनुयायी इंग्लैंड, अमेरिका, जापान, फ्रांस, रूस, आस्ट्रेलिया आदि देशों से यहां पहुंचकर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। आश्रम स्थल से दिखने वाली हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं यहां आने वालों का मन मोह लेती हैं।
पर्यटन विभाग बनाएगा हेरीटेज कार्ययोजना
चंपावत। पर्यटन विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थलों के बीच ट्रेकिंग रूट विकसित करने के साथ ही विभिन्न स्थलों को हेरीटेज योजना में शामिल करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिला पर्यटन विकास अधिकारी लता बिष्ट के अनुसार इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।