लधिया घाटी के दूरस्थ टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) में मरीज बेहाल हैं। महीनों से वे इलाज के लिए तरस रहे हैं। यहां न कोई डॉक्टर है और नहीं कोई फार्मेसिस्ट। मरीजों का इलाज वार्डब्वाय कर रहा है। यहां तक कि टांण के डॉक्टर लंबे समय से लोहाघाट अस्पताल से संबद्ध हैं। संबद्धीकरण निरस्त करने के आदेश के बावजूद अपने मूल तैनाती स्थल में नहीं पहुंच सके हैं।
लाखों रुपये की लागत से बना टांण अस्पताल खुद बीमार हाल में है। टांण, साल, ककनई, खटोली, वैला, मछियाड़ सहित एक दर्जन से ज्यादा गांव के पांच हजार से अधिक लोग इस अस्पताल पर आश्रित हैं, लेकिन कागजों में डॉक्टर होने के बावजूद मरीजों के लिए वे उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर लोहाघाट संबद्ध होने से यहां नई तैनाती भी नहीं हो पा रही है। वहीं फार्मेसिस्ट की तैनाती भी नहीं की गई है। अस्पताल का वार्डब्वाय राजेंद्र गिरि गोस्वामी ही अस्पताल का इकलौता कर्मी है। अस्पताल में जो भी इलाज मिलता है, वह इसी वार्डब्वाय के जरिए मरीजों को नसीब हो पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों को मामूली परेशानी के लिए 24 किलोमीटर दूर रीठा साहिब आना होता है। ग्राम प्रधान भागीरथी गड़कोटी, उप प्रधान आनंदी देवी, भोला दत्त गड़कोटी, रामदत्त जोशी, गंगा जोशी, खीमानंद गड़कोटी आदि ने जल्द से जल्द डॉक्टर की तैनाती की मांग की है।
इधर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एमएस बोहरा ने लोहाघाट संबद्ध टांण के डॉक्टर मंजीत सिंह को मूल तैनाती स्थल में जाने के आदेश दिए हैं, लेकिन दो सप्ताह बीतने के बावजूद डॉक्टर ने चार्ज नहीं लिया है। इधर डा.मंजीत सिंह का कहना है कि फिलहाल उनके पास लोहाघाट के चिकित्साधीक्षक का प्रभार भी है। चिकित्साधीक्षक डा.वीके जोशी के चिकित्सा अवकाश में होने से वह कार्यमुक्त नहीं हो पा रहे हैं। उनके आते ही वे टांण अस्पताल चले जाएंगे।
कोट
लोहाघाट संबद्ध किए गए चिकित्साधीक्षक डा.मंजीत सिंह को उनके मूल तैनाती स्थल टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल वापस भेजने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन उनको कार्यमुक्त करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डा.वीके जोशी चिकित्सा अवकाश में है। डा.जोशी के चिकित्सा अवकाश से लौटने के बाद डा.सिंह टांण चले जाएंगे। -डा.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।