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जनवरी में नसबंदी, सितंबर में जन्मा शिशु

Fri, 18 Sep 2015 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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मौनपोखरी ग्राम पंचायत के कठनौली गांव की हेमा देवी और डिकर सिंह ने परिवार छोटा रखने की मंशा से परिवार नियोजन का तरीका अपनाया। हेमा देवी का जनवरी में नसबंदी ऑपरेशन कराया गया, लेकिन नसबंदी के बावजूद सितंबर में हेमा देवी ने एक और संतान को जन्म दे दिया। नसबंदी के बाद शिशु के जन्म से ये दंपति हतप्रभ है। इसे लेकर शुक्रवार को दंपति ने मुख्य चिकित्साधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
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हेमा देवी ने 21 जनवरी 2015 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी ऑपरेशन कराया था। इसका बाकायदा हेमा के पास प्रमाणपत्र भी है, लेकिन नसबंदी के करीब 8 माह बाद उसने शिशु को जन्म दिया। पति डिगर सिंह का कहना है कि पत्नी हेमा ने 15 सितंबर को जिला अस्पताल में बेटे को जन्म दिया है, जबकि पहले से ही उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। इसी वजह से उन्होंने नसबंदी का फैसला किया था।

पति डिगर सिंह ने शुक्रवार को सीएमओ को भेजे पत्र में नसबंदी ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने परिवार की कमजोर माली हालत के मद्देनजर मुआवजे की मांग की है।
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कहीं न कहीं तो रही चूक
नसबंदी ऑपरेशन के बाद संतान का जन्म लेना स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। महिला की नसबंदी से पूर्व गर्भवती टेस्ट होता है। गर्भवती टेस्ट के पॉजिटिव होने पर नसबंदी नहीं की जाती है। अब स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हो सकता है कि नसबंदी के दौरान महिला की दो में से एक ट्यूब बंद न हो पाई हो।

मुआवजे के लिए समय पर देनी होती है सूचना
नसबंदी के बाद भी शिशु जन्म होने पर मुआवजे की गारंटी नहीं है। एनआरएचएम के समन्वयक गौरव पांडेय का कहना है कि क्षतिपूर्ति के लिए गर्भ ठहरने के 90 दिन के भीतर विभाग को सूचना देनी होती है। इस प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही मुआवजे के रूप में 30 हजार रुपये की मदद मिलती है।
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