जिला अस्पताल में असंवेदनशीलता फिर उजागर हुई है। एक गर्भवती महिला को इलाज देने के लिए महिला डॉक्टर भी अस्पताल में तैनात नहीं थी। अस्पताल ने गर्भवती की हालत को गंभीर बताकर तत्काल रेफर किया। वहीं रेफर होने के बमुश्किल दो घंटे के भीतर शहर के प्राइवेट अस्पताल में महिला ने ऑपरेशन के जरिए शिशु को जन्म दिया।
पूर्व छात्र नेता मनोज तड़ागी ने बताया कि उनकी चाची भावना (29) को तबियत बिगड़ने पर रविवार मध्यान्ह जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी में पुरुष डॉक्टर थे। महिला डॉक्टर को बुलाने के लिए कॉल की गई, लेकिन तड़ागी का आरोप है कि काफी देर तक डॉक्टर नहीं पहुंची। परेशानी बढ़ने पर अस्पताल से महिला को रेफर कर दिया गया। इसके बाद शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में गर्भवती को ले जाया गया, जहां उसने अपरान्ह करीब दो बजे शिशु को जन्म दिया।
लोगों का कहना है कि 15 डॉक्टरों वाला चंपावत जिला अस्पताल गर्भवती महिलाओं के इलाज लायक भी नहीं रहा गया है, जबकि इक्का-दुक्का डॉक्टरों वाले प्राइवेट अस्पताल में ये इलाज आसानी से हो रहा है। जिला अस्पताल में सर्जन और निश्चेतक दोनों की तैनाती है, मगर यहां ऑपरेशन नहीं होते हैं। अब लोगाें ने अस्पताल की खामियों को लेकर आवाज उठाने की बात कही है।
भावना तड़ागी की तबियत बिगड़ रही थी। गर्भवती महिला की हिफाजत करने के लिए ऑपरेशन जरूरी था, लेकिन यहां ब्लड बैंक नहीं होने से परेशानी आ रही है। महिला डॉक्टर को बुलाने के लिए फोन किया गया था, लेकिन दूरी की वजह से डॉक्टर को पहुंचने में समय लगा। तकलीफ बढ़ने की वजह से गर्भवती को हायर सेंटर रेफर किया गया। -डा.आरके जोशी, सीएमएस, जिला अस्पताल, चंपावत।