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स्कूल से दूर हो जाएंगे सैकड़ों छात्र

Fri, 05 May 2017 10:55 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
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तीन छात्रसंख्या वाला प्राथमिक विद्यालय तपनीपाल - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार दस तक की छात्र संख्या वाले राजकीय प्राथमिक और जूनियर हाइस्कूलों का नजदीकी स्कूलों में विलय करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसे लेकर विभागीय स्तर पर भी हलचल तेज है। ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार की जा रही है। शिक्षा निदेशक ने 12 मई को देहरादून में इस संबंध में बैठक भी आहूत की है। जिले में 71 स्कूलों में छात्रों की संख्या दस या दस से कम है, अगर इन स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में विलय किया जाता है, तो सैकड़ों छात्रों के स्कूल जाने में तलवार लटकने का अंदेशा है। क्योंकि फिर इन छात्र-छात्राओं को दूसरे स्कूल में जाने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। 71 में से 48 स्कूलों के नौनिहालों को स्कूल आने और जाने के लिए छह किमी से 12 किमी तक की पैदल दूरी तय करनी होगी।

चंपावत जिले के 598 सरकारी प्राथमिक एवं जूनियर हाइस्कूलों में से 67 प्राथमिक और 4 जूनियर हाइस्कूलों में छात्र संख्या दस या दस से कम है। इस वक्त इन 71 स्कूलों में कुल 486 बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत स्कूल की अधिकतम दूरी एक किमी से अधिक नहीं होनी चाहिए, मगर कम संख्या वाले स्कूलों के बंद होने की दशा में विद्यालय का फासला इससे कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगा। खेतसारी प्राइमरी स्कूल के बच्चों को स्कूल जाने के लिए छह किमी दूर बिल्दे स्कूल जाना होगा। यानि रोज 12 किमी की पैदल दूरी तय करनी होगी।
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ऐसी ही हालत का सामना इड़ाकोट, डुंगरी, लोजनी, भोजनी, कमलेड़ी, निगाली, कोटकेंद्री, गजार, बुंगादुर्गापीपल, सेलागाड़, थपलियालखेड़ा, बिनवालगांव, मथेलाछाना, सुंदरचौड़, तल्ली लड़ी, मगरियां, तपनीपाल, छुलापै, मिर्तोली, ओखलेख, जमरेड़ी, लीदू, जमाड़, छीड़ाबांस समेत 48 स्कूलों के बच्चों को भी करना होगा। शिक्षाविदों का कहना है कि छोटे बच्चों को पहाड़ी भौगोलिक हालात में पैदल फासला तय करने में बरसात और जाड़ों में बेहद परेशानी होगी।
 



दस तक की छात्र संख्या वाले स्कूल
चंपावत विकासखंड
प्राथमिक विद्यालय : सतकुला, पड़ंगा बड़ोली, लड़ाबोरा, रीठा बड़ोली, भीजर, सुयालखर्क, सिंडाला, नैनी, पोलप, पिनानाभाट, उदाली, निगाली, मथियाबांज, कोटकेंद्री, गजार, बुंगा दुर्गापीपल, सेलागाड़ एवं थपलियालखेड़ा।

लोहाघाट विकासखंड
प्राथमिक विद्यालय : कर्णकरायत, कुंडीमारा, झालनदेव, मझेड़ा, इड़ाकोट, डुंगरी, कुलौली, रौंटला, लोजनी, कमलेड़ी, भोजनी, नाकोट खोलिया, कंटुकरा एवं खेतसारी।

पाटी विकासखंड
प्राथमिक विद्यालय : कांडे, भुइयां, नैलोड़ी, वालीगांव, डुंगरासौ, पिपलाटी, रीठा, बड़ेत, ब्रुसखोला, भैसर्ख, कोटा, खिरकुड़ा, मगरियां, तल्ली लड़ी, सिरतोली, करौली, सुंदरचौड़, मड़ियोली, बिनवालगांव एवं मथेला छाना।
जूनियर हाइस्कूल : तपनीपाल व भोकड़ा।

बाराकोट विकासखंड
प्राथमिक विद्यालय : छुलापै, खोला सुनार, बैड़ा, जमरेड़ी, जमाड़, लीदू, चमरौली, छंदा, तल्ला, दयारतोली, खकोड़ा, छीड़ाबांस, कोठेरा, ओखलेख एवं संतोला।
जूनियर हाइस्कूल : छुलापै एवं मिर्तोली।


एक छात्र पर हर माह खर्च हो रहे 8 हजार रुपये
जिले में दस या दस से कम छात्रों वाले 71 प्राथमिक एवं जूनियर हाइस्कूलों में 486 छात्रों को पढ़ाने के लिए 118 शिक्षक हैं। सिर्फ शिक्षकों का वेतन आधार माना जाए, तो यहां पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र पर हर माह औसतन करीब 8 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
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कोट---
दस छात्र संख्या तक के स्कूलों को बंद कर अन्यत्र विलय करने का अभी कोई आदेश नहीं मिला है। अलबत्ता निदेशालय ने दस छात्र संख्या वाले स्कूलों से संबंधित सूची मांगी है। इस संबंध में 12 मई को निदेशालय में होने वाली बैठक के बाद कोई निर्णय होने की उम्मीद है। -सत्यनारायण जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) चंपावत। 
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