चंपावत। चंपावत जिले में उद्यान विभाग मालियों की कमी से जूझ रहा है। इस कारण पौधशाला और उद्यान सचल दल के काम पर असर पड़ रहा है। विभाग मालियों का काम मजदूरों से कराने को मजबूर है।
जिले में उद्यान पौधशालाओं को संवारने के लिए 50 प्रतिशत मालियों की कमी है। जिले में 46 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली छह पौधशालाएं हैं। इन पौधशालाओं में सेब, अखरोट, कीवी, आलू, नाशपाली, नीबू और विविध प्रजाति के फूलों का उत्पादन किया जा रहा है। पौधों की देखभाल, कटाई-छंटाई, खाद-पानी देने के अलावा पौधों को रोग से बचाने के लिए दवा आदि देने के लिए मालियों की कमी है।
पौधशालाओं में मालियों के स्वीकृत 21 पदों के सापेक्ष 11 ही कार्यरत हैं। इसके अलावा 12 उद्यान सचल दलों में 30 के स्थान 15 ही माली हैं। मालियों की कमी को पूरा करने के लिए मजदूरों से काम चलाया जा रहा है। इससे बागवानी और औद्यानिकी विस्तार के काम पर असर पड़ रहा है।
60 लोगों को मिलेगा एक साल का माली प्रशिक्षण
चंपावत। उद्यान निदेशालय चौबटिया में एक साल का माली प्रशिक्षण कराएगा। चंपावत जिले के चार मालियों सहित प्रदेश से कुल 60 लोग प्रशिक्षण ले सकेंगे। डीएचओ टीएन पांडे ने बताया कि इसके लिए 20 नवंबर तक चौबटिया में आवेदन किया जाना है। प्रशिक्षण के लिए चयनित प्रशिक्षणार्थियों को 200 रुपये महीना भत्ता दिया जाएगा।
चंपावत जिले के राजकीय पौधालय
नाम - क्षेत्र (हेक्टेयर में)
मुड़ियानी 12
सेलाखोला 3.20
दिगालीचौड़ 8.78
पाटन 4.00
खतेड़ा 13.50
गोशनी 2.66
कोट
जिले में लगभग 50 प्रतिशत माली कम हैं। किसी तरह श्रमिकों से काम चलाया जा रहा है। माली के खाली पदों को भरने के लिए निदेशालय को पत्र भेज कर आग्रह किया गया है। - टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।