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न लगे उद्योग और नहीं मिल रहा रोजगार

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चंपावत के औद्योगिक आस्थान का शुरुआती बिंदु। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। चंपावत जिले में उद्यमिता के जरिए रोजगार बस सपना बन गया है। चंपावत के औद्योगिक आस्थान में न उद्योग लग पा रहे हैं और नहीं रोजगार मिल रहा है। हाल यह है कि डेढ़ दशक पूर्व स्थापित औद्योगिक आस्थान में 29 उद्यमों में से इस वक्त सिर्फ आठ चल रहे हैं। वहीं 12 उद्योग अलग-अलग वजहों से बंद हो चुके हैं। और नौ का तो काम भी पूरा नहीं हो सका है।
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2.29 एकड़ मेें फैला चंपावत का औद्योगिक आस्थान उद्यमिता का मॉडल नहीं बन सका है और ये तस्वीर 99 साल की लीज पर निशुल्क भूखंड दिए जाने के बावजूद है। हर उद्यमी को 232.19 वर्ग मीटर निशुल्क जमीन देने का मकसद क्षेत्र में उद्यमिता विकास और इसके जरिए रोजगार के मौकों को बढ़ाना था। इन 29 उद्योगों से 87 लोगों को रोजगार भी दिया जाना था लेकिन जब उद्योग ही नहीं लगेंगे तो रोजगार कैसे मिलेगा। अब नतीजा यह है कि 15 साल बाद भी औद्योगिक आस्थान में न सभी उद्योग लग सके और न रोजगार की गति बढ़ी है। जो आठ उद्योग चल रहे हैं, उनसे इस वक्त 23 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इस आस्थान में फल संरक्षण, इंजीनियरिंग, टायर रिट्रेडिंग, प्रिटिंग मशीन, मसाला आदि चल रहा है।
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खूब रहा सियासत का दखल
चंपावत औद्योगिक आस्थान में उद्यमिता से ज्यादा सियासत रही। इसका नतीजा है कि काफी उद्योगों का निर्माण कार्य 15 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। 29 उद्यमियों में से 16 सियासी मैदान के बड़े नाम हैं या उनके निकट संबंधियों को ये प्लांट आवंटित हुए हैं। वहीं उद्यमी बैंक से प्रोजेक्ट के अनुरूप कर्ज नहीं मिलने या प्रोजेक्ट लागत बढ़ने या विपणन की कारगर व्यवस्था नहीं होने को देरी की वजह बता रहे हैं।
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उद्योगों को शुरू नहीं करने वाले उद्यमियों को नोटिस भेजा जा रहा है। साथ ही जिन उद्यमियों की वाजिब समस्या है, विभाग उसके समाधान के प्रयास करेगा। - ज्ञान प्रकाश दुर्गापाल, सहायक महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, चंपावत।
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