टनकपुर का संयुक्त अस्पताल भवन।
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डॉक्टरों और अन्य संसाधनों की कमी से जूझ रहे जिले के मैदानी क्षेत्र के सबसे बड़े टनकपुर संयुक्त अस्पताल के लिए अच्छी खबर है। अस्पताल को मार्च तक हाई परफॉरमेंस एंबुलेंस मिल जाएगी। इस एंबुलेंस में तमाम जीवन रक्षक उपकरण होंगे ताकि जरूरत पड़ने पर जल्द मरीज को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल या दूसरे उच्च केंद्र ले जाया जा सके।
70 हजार की आबादी के इलाज का जिम्मा संभालने वालेसंयुक्त अस्पताल में इस वक्त महज एक-तिहाई डॉक्टर हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी है। बाल रोग विशेषज्ञ और सर्जन छोड़ विशेषज्ञों के सभी पद रिक्त हैं। रेडियोलॉजिस्ट न होने से दो साल से अल्ट्रासाउंड और एक साल से एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। गायनाकॉलोजिस्ट की कमी से गर्भवती महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अस्पताल की बदहाली की वजह से निशुल्क आयुष्मान योजना का लाभ लेने को भी लोग इस अस्पताल मेें नहीं पहुंच रहे हैं। सितंबर 2018 से लागू आयुष्मान योजना का अब तक सिर्फ एक व्यक्ति ने लाभ उठाया है। इन खामियों के मद्देनजर अस्पताल से मरीज को हायर सेंटर रेफर करने के लिए एक आधुनिक सुविधाओं से लेस एंबुलेंस स्वीकृत की गई है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया बीएडीपी से 25 लाख रुपये दिए गए हैं। एंबुलेंस मार्च तक अस्पताल को मिल जाएगी।
संयुक्त अस्पताल में 17 में से सिर्फ छह डॉक्टर हैं। डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञ न होने से अल्ट्रासाउंड और एक्सरे भी लंबे समय से बंद है। डॉक्टरों के पदों को भरा जाना जरूरी है। एंबुलेंस के आने से कुछ राहत जरूर मिलेगी। डॉ. एचएस हयांकी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, टनकपुर।