सरकारी अस्पताल को पीपीपी मोड में दिए 26 माह का समय बीत चुका है। इस अवधि में शील प्रबंधन को लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, लेकिन अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधरने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं। यही नहीं पीपीपी मोड में सौंपने के समय राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत क्रय किए गए लाखों रुपये के उपकरणों को अकुशल लोगों के हाथ में सौंपने से उन्हें कबाड़ बना दिया गया है।
नौ लाख रुपये लागत की ऑपरेशन थिएटर में काम आने वाली सीआरएम मशीन, अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन, डेंटल मशीन, जनरेटर, इनवर्टर, ओटी संबंधी लैप्रोस्कोप, सैडोलैस लैंप, एनालाइजर, कैलोरी मीटर आदि सभी खराब हो गए हैं। अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन को खराब कर कई महीनों तक मशीन का बहाना बनाकर यहां अल्ट्रासाउंड नहीं किए गए। जब नई मशीन मंगाई गई तो रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पिछले आठ माह से दरवाजा बंद पड़ा हुआ है। अस्पताल के बेड, फर्नीचर अन्य सामग्री घरों में प्रयोग की जा रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाएं जहां बाजार की राह देख रही हैं, वहीं उन्हें देय सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। एक्सरे जैसा महत्वपूर्ण कार्य भी अप्रशिक्षित लोगों से कराया जा रहा है। अस्पताल में जगह-जगह कुत्तों ने गंदगी की हुई है।
पीपीपी मोड समाप्त करने को लिखेंगे पत्र
डीएम दीपेंद्र चौधरी ने अस्पताल में हो रहे घटनाक्रमों को बेहद गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि शुरू से ही अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न स्तरों से जो जांचें कराई गई हैं, उसके आधार पर उन्होंने सरकार को चार बार पीपीपी मोड व्यवस्था समाप्त करने को लिखा है। यहां अनुबंध के अनुसार कभी चिकित्सक नहीं रहे। चूंकि एमओयू शासन स्तर पर हुआ है। ताजा परिस्थितियों को देखते हुए वे पुन: राज्य सरकार का इस ओर ध्यान आकर्षित करेंगे। उन्होंने चिकित्सकों की हड़ताल को बेहद गंभीरता से लिया है। कहा कि हड़ताली डाक्टरों के विरुद्ध आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टरों की हड़ताल नवें दिन भी रही जारी
पीपीपी मोड अस्पताल में डॉक्टरों एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की हड़ताल नवें दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को यूनिट हेड डा.रवि सिन्हा, प्रबंधक संजय सैनी, आरपी जोशी, मनोज जोशी के नेतृत्व में सभी कर्मचारियों ने शील प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर आक्रोश जताया। उनका कहना था कि शील प्रबंधन को दो माह का रुका वेतन देने, दो वर्ष से वेतन वृद्धि न होने, पीएफ के भुगतान का विवरण सुनिश्चित करने एवं सभी स्टाफ को आईडी कार्ड जारी करने की मांग को लेकर ज्ञापन भेजा गया था, लेकिन प्रबंधन ने कोई कार्रवाई करने के बजाय उसे दबा दिया है। हड़ताली डॉक्टरों एवं कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएंगी, उनकी हड़ताल जारी रहेगा। यूनिट हेड डा.सिन्हा का कहना है कि यदि कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। प्रदर्शन करने वालों में ज्योत्सना, मंजरी, रंजीता, गीता, लक्ष्मी, अनिल बिष्ट, दीपक जोशी, राजेश चंद्र, महेश जोशी, संदीप, संजीव, राहुल, त्रिलोक सिंह, जीवन सुतेड़ी आदि शामिल थे।