बसान गांव की गर्भवती गौरी देवी।
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लोहाघाट के बसान गांव की गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल रेफर करते रहे, लेकिन इलाज नहीं मिला। मरीज की नाजुक हालत देख परिजनों को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा। तब महिला की हालत सुधरी।
लोहाघाट विकासखंड के बसान गांव निवासी महेंद्र सिंह की पत्नी गौरी देवी (24) तीन माह की गर्भवती थी। गर्भस्राव (मिस करेज) होने पर उसकी तबीयत बिगड़ गई। सोमवार रात 9 बजे परिजन उसे लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। यहां से महिला को सोमवार रात 10:30 बजे 13 किमी दूर चंपावत जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल की महिला डॉक्टर वर्षा ने प्राथमिक उपचार किया।
गौरी को अत्यधिक रक्तस्राव और निम्न रक्तचाप (90-60 एमएम) था। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने बताया कि बगैर गायनाकोलोजिस्ट के ऑपरेशन करना खतरनाक था।
इसके चलते महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया लेकिन परिजन गौरी देवी को यहां से 75 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ महिला अस्पताल ले जाने के बजाय लोहाघाट के निजी अस्पताल ले गए। वहां उसका ऑपरेशन किया गया। महेंद्र सिंह का कहना है कि वक्त पर हुए ऑपरेशन से पत्नी की जान बच सकी। मंगलवार दोपहर महिला को डिस्चार्ज भी कर दिया गया।
चंपावत जिले में एक भी गायनाकोलोजिस्ट नहीं
चंपावत। चंपावत जिले में छोटे-बड़े कुल 23 सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन जिला अस्पताल सहित किसी भी अस्पताल में एक भी गायनाकोलोजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) नहीं है। एक साल से चंपावत जिला अस्पताल में भी गायनाकोलोजिस्ट का पद खाली है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि गायनोकोलोजिस्ट के लिए हर महीने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। जिले में एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और चार स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इन पर तैनाती नहीं है।