चंपावत/पाटी। यहां वसंत पंचमी में शिक्षाविद डॉ. कीर्ति बल्लभ सक्टा के आवास में बैठकी होली हुई। गिरीश चंद्र पंत ने राग खमाज में इस गीत के साथ होली का शुभारंभ किया। मैं तुमसे खेलूंगी होरी। दिनेश बिष्ट ने मुरली अधर धर तान सुनावे, संजय जोशी ने रसिया खेलन आयो मो संग होरी, डॉ. विनोद पाठक ने आयो नवल वसंत, प्रकाश पांडेय ने मन रंग दे करतर, संस्कृत विद्यालय के शिक्षक उमापति जोशी ने ऐसे ब्रज के बसन से मैं आई ब्रज, जीवन चंद्र जोशी ने पैय्यां पड़ू पलंगा नाहीं चुन्नड़ी होली गीत पेश किया। इस दौरान डॉ. कमलेश सक्टा, भैरव दत्त पांडेय, राजेंद्र भट्ट, प्रकाश दुबे आदि थे।
पाटी में श्री मष्टा संगीत कला समिति की ओर से आचार्य ललित सोराड़ी के आवास पर गणपति वंदना के साथ बैठकी होली शुरू हुआ। संगीत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य सीएस मौनी में राग बसंत में आज बसंत सुहायो गाकर होली का माहौल बना दिया। समिति के अध्यक्ष एमएन पचौली ने राग काफी में आयो नवल बसंत सखी ऋतु राज कहायो का गायन किया। पंकज पचौली ने राग काफी में बैरन के मन भाये श्याम मोसे खेलो न होली, एलएम सौराड़ी ने आई बसंत बहार सखी मोहे अति मन भावे, एमसी भट्ट ने राग जंगला काफी में सखी कौन गलिन गयो श्याम, आचार्य केसी भट्ट ने कान्हां पे तन-मन सब वारूंगी, अबके होलिन में गीत ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
होल्यार बीसी भट्ट ने सैंय्या से मिला दीजो रे हूं बैरागिन अपने पिया की, उदीयमान कलाकार सौरभ अवस्थी ने राग सुहाना में मुरली अधर धर तान सुनावे नाहक कान्हा मोह, सागर मौनी ने राग काहे संग खेलूं मे होली कैसी दुर्गति मोरी, सीएस मौनी ने देखे बिना नहीं चैन याद आवे मोहे निस दिन रचना गीत की प्रस्तुति दी। तबले में संगत दीपक लडवाल, सौरभ अवस्थी, सागर मौनी ने दी। राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक रवीश पचौली ने काव्य पाठ हम भी क्यों न सीखें बसंत से सुनाकर समापन किया।