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चंपावत जिला मुख्यालय में नहीं है एचआईवी जांच की सुविधा

Wed, 30 Nov 2016 10:07 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’/अमर उजाला, चंपावत
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विश्व में एक्वावड इमिनो डिफिसिएंशि सिंड्रोम (एड्स) अथवा एचआईवी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं चंपावत जिले में तो इस रोग से लड़ने के हथियार भी पूरे नहीं है। चंपावत जिला मुख्यालय में एचआईवी जांच की सुविधा तक मुहैया नहीं है। यदि बात एड्स रोग के साथ जी रहे लोगों की मृत्युदर की करें तो यहां बीते 12 साल में 34 लोगों की मौत हो चुकी है।
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एचआईवी के काउंसलिंग का स्वैच्छिक परामर्श एवं परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) जिला मुख्यालय में नहीं होने से लोगों को काउंसलिंग के लिए 15 किलोमीटर दूर लोहाघाट में जाने की मजबूरी है। जिले में आईसीटीसी लोहाघाट के अलावा टनकपुर में भी हैं, लेकिन चंपावत जिला अस्पताल में एकमात्र लैब तकनीशियन होने और उस पर कार्य का अत्यधिक दबाव होने के कारण रक्त की जांच नहीं हो पा रही है।

जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डा.केसी ठाकुर के अनुसार जिले में बीते चार वर्षों में एचआईवी पाजिटिव पाए गए 47 लोगों में से 41 को एंटी रिट्रावायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) केंद्र हल्द्वानी रेफर किया गया। इसमें से एक एचआईवी पाजिटिव रोगी की मौत हो चुकी है, जबकि शेष का इलाज चल रहा है।
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एड्स नियंत्रण के जिला कार्यक्रम समन्वयक दुर्गेश सिंह का कहना है कि एचआईवी पाजिटिव होने का पता लगने पर लोग अक्सर सदमे में चले जाते हैं, लेकिन एचआईवी पाजिटिव व्यक्ति सधी हुई दिनचर्या, सही खानपान और हौसले के साथ काफी जिंदगी जी सकता है। इसमें काउंसलरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इस साल अब तक चंपावत जिले के दोनों आईसीटीसी केंद्रों में 3258 लोगों की काउंसलिंग और परीक्षण किया गया। इसमें 13 लोग एचआईवी पाजिटिव पाए गए। इन सभी लोगों को एआरटी केंद्र हल्द्वानी रेफर किया गया।
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चंपावत में एचआईवी प्रगति रिपोर्ट 2013 से 2016 तक
वर्ष          मरीजों का परीक्षण       एचआईवी पाजिटिव
2013           4623                    14
2014           4303                    13
2015           2987                    07
2016           3258                    13
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