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रोजगार से जोड़ें, तभी बनेगी जन-जन की भाषा

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हिंदी हैं हम. कार्यक्रम के अंतर्गत चंपावत जिला पुस्तकालय में विचार रखतें साहित्यकार प्रकाश जोशी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। अमर उजाला फाउंडेशन के हिंदी हैं हम कार्यक्रम के तहत यहां जिला राजकीय पुस्तकालय में शुक्रवार को हिंदी भारत के माथे की बिंदी विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई।
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इसमें छात्राओं ने कहा कि हिंदी आम लोगों की भाषा तो है, लेकिन इसके हर वर्ग से जुड़ाव के लिए रोजगार से जोड़ना चाहिए। उच्च शिक्षा, अनुसंधान, ज्ञान, विज्ञान से भी हिंदी को जोड़ने की जरूरत है।
साहित्यकार जनकवि प्रकाश जोशी शूल ने अभियान की जानकारी देकर युवा-वायु शीर्षक से कविता कविता सुनाई। उन्होंने कहा कि सभी अवस्थाओं में कुछ कर गुजरने की उम्र युवा होती है क्योंकि युवा में ही वायु सी गति होती है। पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह मेहता ने भी कविता सुनाई।
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इसके बोल थे - अपनेपन की चली हवाएं हिंदी के शृंगार से हिंदी के द्वार बुला रहे हैं, साम समुंदर पार से। वहां मौजूद मनोज जोशी, संदीप खर्कवाल समेत सभी छात्र-छात्राओं ने हिंदी को बढ़ावा देने की शपथ भी ली।
हिंदी को उन्नति का शिखर देने के लिए इसे घर-परिवार से स्कूल-कॉलेज तक बोलचाल की भाषा बनाना होगा। ऐसा न हो कि उच्च शिक्षा में जाते-जाते हम हिंदी से दूर हो जाएं।
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- लता जोशी, प्रतियोगी छात्रा, चंपावत।
हिंदी भाषा को जन-जन की भाषा बनाने के लिए जन सहभागिता जरूरी है। इसे रोजगार से जोड़ने से लेकर सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे।
- पंकज भट्ट, प्रतियोगी छात्र, चंपावत।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के लोगों को हिंदी से जोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर असरदार पहल करनी होगी। अंग्रेजी को विशेष दर्जा न दिया जाए।
- दीपक भट्ट, प्रतियोगी छात्र, चंपावत।
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