बनलेख के पास शनिवार को धारचूला से टनकपुर को जा रही उत्तराखंड परिवहन निगम की बस (यूके 07-1450) के ब्रेक फेल होने पर चालक ने इसे खाई में गिरने से बचाने के लिए दोे बार पहाड़ी से टकरा दिया जिससे बस सड़क पर पलट गई। इससे चालक समेत आठ लोग घायल हो गए। यदि नायकगोठ निवासी बस चालक उमेद सिंह पुत्र मान सिंह बस को पहाड़ी से नहीं टकराता तोे बड़ा हादसा हो सकता था क्योंकि हादसे के वक्त बस में उसके समेत 37 यात्री थे।
घायलों को 108 से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। एसडीएम सदर भगत सिंह फोनिया ने अस्पताल पहुंच कर घायलों का हालचाल जाना। डा.प्रदीप बिष्ट, डा.उदयशंकर, डा.इंद्रजीत, स्टाफ नर्स शीला, सुधा पांडेय, फार्मेसिस्ट एससी जोशी, विष्णु गिरि, तान सिंह आदि ने घायलों का इलाज किया। बस में टनकपुर और धारचूला के यात्री बैठे थे।
ये हुए घायल
रोडवेज बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल बिंदु देवी (47) पत्नी धनी राम को हायर सेंटर रेफर कर दिया है। अन्य घायलों में टनकपुर निवासी चालक उमेद सिंह (48) पुत्र मान सिंह, धनी राम (47) पुत्र कालू राम, जानकी कुमारी (13) पुत्री चंद्र राम, राम सिंह (44) पुत्र गोविंद सिंह, जय राम (61) पुत्र मनी राम, प्रताप सिंह (77) पुत्र किशन सिंह, पार्वती देवी (22) पत्नी राम सिंह हैं।
कलपुर्जों के अभाव में कहीं भी खड़ी हो जाती हैं बसें
रोडवेज बसों में पार्ट्स और कलपुर्जों की कमी को दुरुस्त करने के लिए कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिस कारण कलपुर्जों के अभाव में रोडवेज की बसें कहीं भी खड़ी हो जाती हैं। यही नहीं रोडवेज की ओर से ऐसी बसों को भी रोड में उतारा जा रहा है, जो अपना निर्धारित माइलेज पूरा कर चुकी हैं। हालांकि शनिवार को बनलेख के पास ब्रेक फेल से दुर्घटनाग्रस्त हुई बस अभी केवल तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय चुकी है। आम तौर पर छह लाख किमी चलने के बाद बसों को ऑफ रूट कर दिया जाता है।
लोहाघाट डिपो में रोडवेज की ओर से 34 बसों का संचालन किया जा रहा है, जिसमें आठ नई, 11 मध्यम दर्जे एवं शेष बसें अपने निर्धारित दूरी पूरी करने की स्थिति में हैं। खराब और जर्जर स्थिति में पहुंची बसों का संचालन करने से यात्रियों को भारी दिक्कत होती है। इन बसों का कोई ठिकाना नहीं हैं कि वह मार्ग में कहां खड़ी हो जाएं। डिपो की अधिकांश बसों का दिल्ली, बरेली, देहरादून आदि स्थानों के लिए संचालन किया जाता है। स्थानीय संपर्क मार्गों में इक्का दुक्का बसें ही संचालित की जाती हैं। कलपुर्जों के अभाव में वर्कशॉप की स्थिति बेहद खराब है।