नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। नगर पंचायत के सामने सबसे बड़ी दिक्कत कूड़ा निस्तारण की है। नगर पंचायत द्वारा मेलाखाल में बनाया जा रहा ट्रंचिंग ग्राउंड का कार्य भी धनाभाव के कारण लंबे समय से लटका पड़ा हुआ है। नगर पंचायत अक्सर शहर के कूड़े को जलाकर निस्तारित कर रही है।
आधे-अधूरे ट्रंचिंग ग्राउंड में पंचायत द्वारा कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। नगर पंचायत द्वारा 1.20 करोड़ रुपये की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) शासन को भेजी गई थी। करीब नौ लाख रुपये लागत से दीवार, समतलीकरण और पहुंच मार्ग बनाने में खर्च किए जा चुके हैं। बजट के अभाव में आगे का काम अधर में लटका पड़ा है। नगर पंचायत के अंतर्गत सभी सात वार्डों में करीब 19 कूड़ेदान बने हुए हैं।
जिनमें नगर क्षेत्र का सारा जैविक और अजैविक कूड़ा डाला जाता है। नगर की वीवीआईपी डाकबंगला मार्ग पर बने कूड़ादान जर्जर हालत में है। जिसमें लोगों द्वारा डाला गया सारा कूड़ा बंदर, आवारा पशुओं द्वारा सड़क में फैलाया जाता है। डाक बंगला मार्ग से आगे पंचेश्वर टैक्सी स्टेंड तक एक भी कूड़ेदान का निर्माण नहीं किया गया है। स्टेशन बाजार में व्यापारी सड़ीगली सब्जियां, कपड़े, कांच सभी प्रकार का कूड़ा खुले में सड़क में डालते हैं।
विरोध के बाद भी चंदखाल में डाला जा रहा है कूड़ा
नगर पंचायत द्वारा कई वर्षों तक नगर के कूड़े को पहले शंखपाल नामक स्थान में डाला गया। ग्रामीणों के भारी विवाद के चलते नगर पंचायत को कूड़ा स्थल बदलना पड़ा। पंचायत ने कूड़ा निस्तारण के लिए चंदखाल (फर्नहिल) स्थान में 0.4 हेक्टेयर भूमि 30 वर्षों के लिए लीज में ली गई है। शुरुआत में कुछ समय तक यहां कूड़ा डाला गया। चांदमारी, राईकोट, कलीगांव के लोगों ने कूड़े से रिसने वाली गंदगी से नीचे गधेरे में बनी उनके गांवों की पेयजल योजना का स्रोत दूषित होने की बात कहकर इसका विरोध किया। लेकिन इसके बाद में यहां लगातार कूड़ा डाला जा रहा है। यहां पर कूड़े के निस्तारण जलाकर किया जाता है।
स्वच्छकों के न हाथ में दस्ताने न मुंह में मास्क
नगर पंचायत में स्वच्छता कार्यों के लिए 17 पर्यावरण मित्रों की तैनाती की गई है। लेकिन पर्यावरण मित्रों को कूड़ा उठाने के लिए कोई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जैविक और अजैविक कूड़ा लोगों द्वारा एक साथ डाला जाता है। कूड़ा उठाते समय पर्यावरण मित्रों के पास न तो दस्ताने होते हैं और न ही मुंह में मास्क ही लगा होता है। पर्यावरण मित्रों का कहना है कि उन्हें न तो दस्ताने दिए जाते हैं और न हीं मास्क। उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं कराया जाता है।
कोट
शासन से ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए धन आवंटित न होने से यह कार्य अधूरा लटका हुआ है। नगर से हर रोज करीब चार टन कूड़े का निस्तारण किया जाता है। कूड़े के निस्तारण के लिए दो बड़े वाहन और एक पिकअप की व्यवस्था की गई है। पिकअप द्वारा लोगों के घर-घर जाकर कूड़े का निस्तारण किया जाता है।
कमल कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, लोहाघाट।