मोदी सरकार ने पहली फरवरी को पेश किए गए अपने बजट में करीब 10 करोड़ परिवारों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर करने की योजना प्रस्तावित की है। अगले आठ महीनों में इस बीमा योजना का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। मगर प्रदेश में इस वक्त चल रही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के हाल बे-पटरी है।
पिछले साल नवंबर में सरकार ने एमएसबीवाई से बीमा कंपनी को अलग करते हुए योजना के लाभ लेने से पूर्व मरीज के लिए सीएमओ का अनुमोदन जरूरी कर दिया। चंपावत जिले में मौजूदा वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में सिर्फ सात लोगों ने इलाज कराया है। जबकि पिछले साल नवंबर से एक भी व्यक्ति ने योजना के तहत इलाज नहीं कराया है।
एमएसबीवाई के तहत 458 गंभीर रोगों के अलावा 1206 सामान्य रोगों के इलाज के लिए 1.75 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का प्रावधान है। मगर जमीनी हकीकत योजना पर सवाल उठाती है। न तो लोग इस योजना पर भरोसा कर पा रहे हैं और नहीं उपचार करने वालों के अनुभव मीठे रहे। सिन्याड़ी के संजय चौड़ाकोटी के पिता एक साल पूर्व योजना के तहत ऊधमसिंह नगर जिले के एक निजी अस्पताल गए, मगर उपचार में बड़ी रकम उन्हें जेब से लगानी पड़ी। एमएसबीवाई के तहत जिले के चार अस्पताल (जिला अस्पताल, लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, टनकपुर संयुक्त अस्पताल के अलावा टनकपुर का तुषार अस्पताल एंड चेरिटेबिल ट्रस्ट) सूचीबद्ध है।
तीनों सरकारी अस्पतालों में से किसी में भी ऑपरेशन होना तो दूर, सामान्य सुविधा देने लायक जरूरी संसाधन नहीं है। इसके चलते लोग योजना का लाभ नहीं उठा सके।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की नोडल अधिकारी एसीएमओ डा.रश्मि पंत ने बताया कि 2017 में योजना के तहत कुल 33371 लोगों ने पंजीकरण कराया, लेकिन योजना का लाभ उठाने वालों की संख्या सिर्फ सात है। वहीं टनकपुर के तुषार अस्पताल का दो साल से करीब तीन लाख रुपये का बकाया चुकता नहीं किया जा सका है।
मरीज को इस तरह मिल सकेगा इलाज
एमएसबीवाई के कार्डों से ही बीमा के अनुमन्य अस्पतालों में इलाज कराने के सरकार ने निर्देश दिए हैं। नए निर्देशों के मुताबिक पुराने कार्ड के साथ मरीज को चंपावत जिले के चार अस्पतालों में इलाज की सुविधा है। मगर इसके लिए संबंधित अस्पताल के प्रभारी को इलाज की अनुमति के लिए सीएमओ को मेल करनी होगी। सीएमओ की अनुमति के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होगी।
एमएसबीवाई की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। पिछले साल तक बीमा की ये योजना निजी बीमा कंपनी के जरिए संचालित थी, मगर योजना के संचालन को प्रभावी बनाने के लिए सरकार नए तरीके से लागू करने के नियम तैयार कर रही है।
डॉ.एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
तो किसी काम के हैं ये बड़े सरकारी अस्पताल
27 जनवरी की रात बाराकोट के ललित मोहन जोशी बाइक दुर्घटना में चोटिल हुए। वे बाराकोट से सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। प्राथमिक इलाज के अलावा उन्हें अपना पूरा इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराना पड़ा। यहां तक की 27 जनवरी की रात ही उन्हें पांव का एक्सरे भी चंपावत के निजी अस्पताल में कराना पड़ा। हड्डी फैक्चर होने पर उन्हें अस्थि रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद रेफर होना पड़ा। पिथौरागढ़ के एक निजी अस्पताल में उनके पांव का ऑपरेशन हुआ। चंपावत व पिथौरागढ़ में जिला अस्पताल होने के बावजूद निजी अस्पताल की शरण में जाना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को आइना दिखाता है।