ब्लॉक के कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क सुविधा के अभाव में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कतें बीमार, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को सड़क मार्ग तक लाने में हो रही है। जिन्हें दुर्गम रास्तों को पार कर कुर्सियों की डोलियां बनाकर सड़क तक लाया जाता है। ऐसा ही गांव है ग्राम पंचायत करौली, जो बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है।
गांव के सैंतोड़ा तोक की 73 वर्षीय वृद्धा गंगा देवी को पिछले दिनों अचानक लकवे का दौरा पड़ा। वह पिछले 24 साल से अपनी बेटी जानकी के साथ रहती हैं। दौरा पढ़ने के बाद ग्रामीण उन्हें 11 किलोमीटर दूर दुर्गम रास्तों को तय कर डोली से रीठासाहिब तक लाए। रीठासाहिब में उपचार के बाद वृद्धा ने लोगों से उनके पैतृक गांव बितलाड़ ले जाने की बात कही। ग्रामीण उन्हें रीठासाहिब से चंपावत ब्लॉक के केदार बैंड तक 40 किमी वाहन से ले जाने के बजाय आठ किमी तक पैदल डोली से बितलाड़ ले गए। गांव के मोहन बिनवाल, हरीश बिनवाल, महेश बिनवाल, कृष्णा बिनवाल, बेनी प्रसाद अटवाल, मुकेश बिनवाल, प्रेम बल्लभ, गिरीश अटवाल, तुलसी प्रसाद, जानकी देवी, पूर्णावती, पार्वती देवी, हीरा देवी, आरती देवी आदि का कहना है कि कई सरकारें आई और गई लेकिन गांव की दशा नहीं सुधर सकी। उन्होंने गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के साथ ही बुनियादी सुविधाएं दिलाने की मांग उठाई है।