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विश्व ट्रॉमा दिवस पर:खत्म नहीं हुआ ट्रॉमा सेंटर के उपयोग का इंतजार

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टनकपुर का ट्रामा सेंटर भवन। जिसका उपयोग तो अब तक नहीं हो सका है, मगर इसके शीशे टूटने लगे हैं। - फोटो : CHAMPAWAT
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इमरजेंसी में उम्दा इलाज देने के लिए चंपावत जिले में खोले गए दोनों ट्रॉमा सेंटर (आपात कालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) भवन सवालों के घेरे में है। 2.02 करोड़ रुपये से बनीं टनकपुर व लोहाघाट की इमारतों को स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किए जाने के बाद तीन साल बीतने के बावजूद मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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ट्रॉमा सेंटर में इलाज शुरू नहीं हो सका और दोनों भवनों के हाल भी ठीक नहीं है। टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन के कई शीशे टूट गए हैं। लोहाघाट के भवन का उपयोग दूसरे रूप में उपयोग किया जा रहा है।
2015 में टनकपुर और लोहाघाट में ट्रॉमा सेंटर बनाए गए लेकिन इन दोनों भवनों का उपयोग इलाज के लिए नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह दोनों ट्रॉमा सेंटरों में सर्जन, निश्चेतक, न्योरो सर्जन सहित डॉक्टरों के 12 और पैरा मेडिकल स्टाफ के 21 पद में से अधिकतर पदों पर तैनाती नहीं होना है। ट्रॉमा सेंटर शुरू नहीं होने से लोगों को वक्त पर जिले में इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर में अल्ट्रासाउंड कक्ष, आशा फेसिलिटेटर कक्ष, आइसोलेशन वार्ड और 108 एंबुलेंस का कार्यालय है। ट्रॉमा सेंटर का संचालन नहीं होने से लोगों को इलाज के लिए 200 किमी दूर हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे जेब पर मार पड़ने के अलावा जिंदगी पर खतरा बढ़ता है।
फिलहाल जिले का कोई भी ट्रॉमा सेंटर काम नहीं कर रहा है। लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर के लिए 33 पदों का सृजन हुआ है लेकिन स्टाफ नर्स को छोड़ किसी की तैनाती नहीं हुई है। वहीं टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर के पदों का सृजन नहीं हुआ है। इसी माह स्वास्थ्य महानिदेशालय ने मानव संसाधन की स्थिति मांगी थी जिसे भेज दिया गया। डॉ. आरपी खंडूरी, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।

लोहाघाट में स्थित ट्रामा सेंटर भवन, जिसमें इस वक्त अस्पताल के कई कार्यालय चल रहे हैं।- फोटो : CHAMPAWAT

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