चंपावत जिले के गौड़ी पावर हाउस की मरम्मत का कार्य शुरू हुआ।
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चंपावत। जिले में करीब ढाई दशक से बंद गौड़ी पावर हाउस में बिजली का उत्पादन फिर शुरू होगा। उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा विभाग (उरेडा) और देहरादून की एक निजी कंपनी के बीच अनुबंध हो गया है। उरेडा की ओर से देहरादून की हरिओम कंस्ट्रक्शन कंपनी को 35 साल की लीज पर पावर हाउस सौंप दिया गया है। कंपनी ने 25 साल से बंद पावर हाउस की नहर और टनल की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।
अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद गौड़ी पावर हाउस को उरेडा को हस्तांतरित कर दिया गया था। उरेडा तब से ही गौड़ी पावर हाउस को दोबारा से संचालित करने की योजना बना रहा था। विभाग को इस कार्य में अब सफलता मिली है। गौड़ी पावर हाउस के दोबारा चालू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज कुमार बजेठा के अनुसार गौड़ी पावर हाउस को दोबारा से शुरू करने के लिए उरेडा ने बीते अक्तूबर में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। इस पर विभाग का हरिओम कंस्ट्रक्शन कंपनी देहरादून के साथ अनुबंध हुआ है। इसके अनुसार कंपनी को पावर हाउस 35 साल के लिए लीज पर दिया गया है। कंपनी ने करीब चार करोड़ रुपये की लागत से मशीन मरम्मत, नहर में लीकेज बंद करने और चैनल बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। (संवाद)
प्रतिदिन दो सौ किलोवाट बिजली का होगा उत्पादन
चंपावत। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी की दूरी पर स्थित गौड़ी पावर हाउस की मरम्मत के बाद प्रतिदिन दो सौ किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। पावर हाउस से उत्पादित बिजली की उर्जा निगम को बिक्री की जाएगी। बिजली बेचने से होने वाली आय का निर्धारित हिस्सा सरकार के खाते में जाएगा। तीन दशक पूर्व तक भी पावर हाउस से सौ किलोवाट के दो टरबाइनों के माध्यम से दो सौ किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जाता था। (संवाद)
पावर हाउस में 1995 से ठप है बिजली उत्पादन
चंपावत। जिले में गौड़ी पावर हाउस का निर्माण वर्ष 1960 में किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने पावर हाउस की नींव रखी थी। यहां उत्पादित बिजली से चंपावत, लोहाघाट, एबट माउंट और मायावती आश्रम को आपूर्ति की जाती थी। लेकिन बाद में ग्रिड लाइन बनने के बाद वर्ष 1995 में पावर हाउस बंद हो गया था। (संवाद)