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बस नाम की सरकारी योजना

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चंपावत। कोरोना काल में आए प्रवासियों को स्वरोजगार देने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना सहित कई योजनाओं का एलान किया है। बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं के लिए आवेदन भी कर रहे हैं, लेकिन साक्षात्कार के बाद योजना में चयनित होने के बावजूद लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। चंपावत जिले में 217 लोगों के साक्षात्कार होने के बावजूद सिर्फ नौ लोगों को ही बैंक की ओर से वित्तीय स्वीकृति मिली है।
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कोरोना काल में 25 हजार से अधिक प्रवासी जिले में लौटे हैं। इनमें से डेढ़ हजार से अधिक लोग मनरेगा में काम कर रहे हैं। अगस्त तक 217 लोगों ने स्वरोजगार योजना के लिए आवेदन किया। उद्योग विभाग के महाप्रबंधक मीरा बोहरा ने बताया कि 32 लोगों के आवेदन बैंकों को भेजे गए। इन भेजे गए आवेदनों में से नौ को ही वित्तीय मंजूरी मिली है। लीड बैंक प्रबंधक एके जोशी का कहना है कि वित्त पोषण से पूर्व बैंक मंजूरी पूर्व सर्वे करता है। इस रिपोर्ट को कर्ज स्वीकृत करने का आधार बनाया जाता है।
डेरी विभाग ने योजना मंजूर की लेकिन कर्ज को तरस गए मुकेश
चंपावत। चंपावत जिले में 50 दुधारू पशु खरीदने की योजना के तहत एकमात्र आवेदन को मंजूरी मिली थी, लेकिन दुग्ध उत्पादन में बढ़ावा और रोजगार प्रोत्साहन करने वाली इस योजना के लिए लोन नहीं हो पा रहा है। योजना के लाभार्थी तपनीपाल दुग्ध समिति के अध्यक्ष मुकेश डिक्टिया का 92.40 लाख रुपये का प्रस्ताव दुग्ध संघ ने अनुमोदित किया, लेकिन बैंक की ओर से कर्ज मिलने में आ रही अड़चन भारी पड़ रही है।
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दुग्ध समिति अध्यक्ष ने बताया कि योजना के अनुरूप उसने कुछ जरूरी आधारभूत ढांचा भी बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन कर्ज नहीं मिल पा रहा है। कहते हैं कि इसे लेकर डेरी के अधिकारियों से लेकर बैंक और जिला प्रशासन के अफसरों से भी गुहार लगा चुके हैं। दुग्ध संघ प्रबंधक राजेश मेहता का कहना है कि राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एनसीडीसी) की पशु खरीद योजना में अब उत्पादक को ही बैंक गारंटी देनी होगी। पहले ये काम समिति के जरिये होता था। इस नए नियम से योजना के लिए चयनित मुकेश डिक्टिया को ही बैंक को गारंटी देनी चाहिए।
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