प्रदेश की सत्ता हरीश रावत के हाथ से छिटक कर भले ही त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथ में आ गई, लेकिन सत्ता के हस्तांतरण से प्रदेश के हालात नहीं बदले हैं। यह कहना है चंपावत और बागेश्वर जिले के लोगों का। आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं।
दोनों ही जिलों में बुनियादी विकास से संबंधित कार्य लटके हैं, सेहत और शिक्षा की हालत तो और भी खराब हैं। जिला मुख्यालय के जीआईसी, जीजीआईसी की व्यवस्था अतिथि शिक्षकों के सहारे है। वहीं जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के लोगों के इलाज के लिए अस्पताल में 2016 से एक अदद डॉक्टर तक नहीं है। नागरिकों का कहना है कि निर्माण ही नहीं, प्रशासनिक सुविधा दूरदराज पहुंचाने में भी सरकार एक साल के दौरान नाकाम रही है।
चंपावत के बंद पड़े कार्य
- जिला जेल भवन का निर्माण कार्य चार वर्ष से लटका है।
- हेलीपैड का काम पिछले साल अक्तूबर से बंद पड़ा है।
- मां पूर्णागिरि धाम के रज्जुमार्ग (रोपवे) का काम आगे नहीं बढ़ा।
- राजकीय पॉलीटेक्निक के भवन का काम भी पिछले साल से लटका है।
- तल्लादेश के मंच में उप तहसील बनी, लेकिन एक साल से यहां से कोई काम नहीं हुआ।
-उप तहसील में ताला लटके होने से लोग चंपावत तहसील आने को मजबूर हैं।
- पुलहिंडोला की स्वीकृत उप तहसील शुरू नहीं हो सकी है।
भाजपा सरकार विकास के दूरगामी नजरिए के साथ काम कर रही है। व्यवस्था को पटरी पर लाने में कुछ समय लगेगा। कोलीढेक झील को स्वीकृति मिल गई है, कठुवापाती में सिडकुल बनाने की कवायद चल रही है। सरकार की एकमात्र प्राथमिकता बुनियादी सुविधा दिलाने के साथ तेजी से विकास का है।
पूरन सिंह फर्त्याल विधायक, लोहाघाट।
भाजपा का एक साल विकासविहीन रहा। पुराने विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है, पुराने निर्माण कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। और मंच सहित अन्य छोटी प्रशासनिक इकाई को निष्क्रिय किया जा रहा है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ी है।
हेमेश खर्कवाल पूर्व विधायक, चंपावत।