परेवा गांव की केशवी देवी पत्नी कृष्ण राम का सात लोगों का परिवार है। इनके राशनकार्ड की यूनिटें भी सात थी, मगर नई ऑनलाइन इंट्री के बाद इनके कार्ड में यूनिट बस एक रह गई है। परिवार की महिला मुखिया का ही नाम रह गया है। ऐसा ही हाल जीवंती देवी, केदार गिरि आदि का भी है। ये एक लंबी फेहरिस्त है, जिसमें यूनिटों में बिना कारण फेरबदल हुआ है। परेवा के कोटे की दुकान में 67 यूनिट कम कर दी गई हैं।
वहीं, मल्लीहाट में पंकज साह की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में यहां से 30 किलोमीटर दूर गुरखौली गूंठ के ढेरों नाम चढ़े हैं। अक्तूबर से पूर्व के राशनकार्डों की संख्या और नाम में भी गड़बड़िया उजागर हुई हैं। आरोप लगाया गया कि पूर्ति विभाग द्वारा ऑनलाइन इंट्री करने से लेकर इन इंट्रियों को सस्ता गल्ला विक्रेताओं को भेजने में चूक हुई है, जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं और उन्हें राशन पाने के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
राशनकार्ड में नाम, यूनिट, गल्ला विक्रेता की दुकान सहित किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर उसे सुधारा जाएगा। उपभोक्ताओं से गड़बड़ी को संबंधित विकासखंड के माध्यम से पूर्ति विभाग को देने को कहा गया है। -एसएल आर्या, जिला पूर्ति अधिकारी।
आधार कार्ड के बगैर नहीं मिल रहा राशन
87 साल के बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षक पीतांबर जोशी ने आरोप लगाया कि आधार कार्ड के बगैर गल्ला विक्रेता राशन नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक उनका आधार कार्ड नहीं बन सका है। शिक्षक जोशी ने विभाग से न्याय की गुहार लगाई है।