उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड चीफ जस्टिस विजेंद्र जैन ने सर्किट हाउस के नजदीक कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था होने पर नाराजगी जताई है। कहा कि सर्किट हाउस के बमुश्किल 200 मीटर दूर कूड़ा डंपिंग जोन बनाया जाना मानवीय दृष्टि से खतरनाक है। आयोग ने राज्य सरकार और नगर पालिका को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि कूड़ा निस्तारण के लिए पालिका ने वनलेख-धौन के पास की जगह का प्रस्ताव भेजा है।
आयोग ने जिला अस्पताल और निर्माणाधीन जेल का मुआयना भी किया। जेल भवन में चहारदीवारी के बाद लटके काम को तुरंत शुरू करने को कहा। कैदियों के लिए वार्ड और अन्य सुविधाओं के लिए रकम रिलीज कराने को कहा। जेल में कैदियों के लिए सभी व्यवस्थाओं की स्थापना करने के लिए नोटिस जारी किया गया। जिला अस्पताल के मुआयने में मुख्य चिकित्साधिकारी डा.विनोद टोलिया ने बताया कि अधिकांश विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। साफ-सफाई के लिए 18 कर्मियों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग से होनी है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजने के बाद भी कोई कदम अब तक नहीं उठाया गया है। आवासीय भवनों के लटके होने को राजकोष का दुरुपयोग बताया। आयोग ने तमाम हीलाहवाली के लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशक को नोटिस भेज जवाब तलब किया है।
इसके अलावा ट्रामा सेंटर शुरू नहीं होने, पुस्तकालय भवन में नियुक्ति नहीं होने के मामले में भी नोटिस जारी किए गए हैं। इस दौरान आयोग के रजिस्ट्रार एसके गुप्ता, केपी गुप्ता, नेहा जैन, अमृत कौर के अलावा सीडीओ श्याम सुंदर पांगती, एसडीएम सीएस डोभाल, रवींद्र सिंह, सीओ आरएस रौतेला, पीडी केएन तिवारी, डीएसडब्ल्यूओ पीसी जोशी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल, जल संस्थान के ईई पीसी करगेती आदि मौजूद थे।
मानवाधिकार हनन में यूएस नगर के सबसे खराब हाल
राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश विजेंद्र जैन ने कहा कि 2013 से अब तक प्रदेश में मानवाधिकार हनन के 3410 मामले दर्ज हुए हैं, इनमें से 3016 का निस्तारण किया जा चुका है। सबसे अधिक खराब स्थिति ऊधमसिंह नगर जिले की है। यहां पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि चंपावत जिले में अब तक 325 शिकायतें मिली हैं। इसमें मात्र 18 शिकायतों का निस्तारण होना बाकी है।