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शिलान्यास के चार साल बाद भी काम शुरू नहीं

Tue, 25 Jun 2019 11:31 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो  चंपावत।
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मां पूर्णागिरि धाम रोपवे के लिए हनुमान चट्टी के पास बना प्लेटफार्म। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थल मां पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालुओं को रज्जुमार्ग (रोपवे) से देवी दर्शन कराने की परियोजना चार साल से ठप है। ठुलीगाड़ मां पूर्णागिरि रज्जुमार्ग परियोजना के काम को दिसंबर 2016 में पूरा होना था लेकिन इसका पूरा होना तो दूर अभी यह काम कायदे से शुरू भी नहीं हो सका है।
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पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में 35 करोड़ रुपये से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई के रज्जुमार्ग के लिए राज्य सरकार ने केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के साथ सहमति पत्र (एमओयू) किया था। रोपवे में चार ट्रालियां लगाए जाने, एक घंटे में 800 यात्रियों की आवाजाही और एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक रोपवे को चलाए जाने जैसे कई प्रावधान किए गए थे। 15 जून 2015 को रज्जुमार्ग का तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिलान्यास भी किया। शिलान्यास के बाद पेड़ काटे जाने, बिजली संयोजन लेने के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं हुआ।

आस्ट्रिया से मृदा परीक्षण की रिपोर्ट अनुकूल
चंपावत। पर्यटन विभाग रज्जुमार्ग परियोजना का काम शुरू कराने के लिए कंपनी को कई बार निर्देश दे चुका है। वहीं कंपनी का तर्क है कि जमीन धंसने की आशंका के मद्देनजर चट्टान का मृदा परीक्षण दोबारा कराया गया। अब इस काम के जल्द शुरू होने की आस जगी है। जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट का कहना है कि मृदा परीक्षण के लिए आस्ट्रिया भेजी गई रिपोर्ट के अनुकूल आने से जल्द काम शुरू हो जाएगा।
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बुजुर्ग और दिव्यांग भी कर सकेंगे दर्शन
चंपावत। रज्जुमार्ग बनने का सबसे ज्यादा लाभ बुजुर्ग, बच्चों और दिव्यांगों को होगा। बुजुर्ग और दिव्यांगों की प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के दर्शन कर सकेंगे। इससे 3 किमी की पहाड़ी के फासले को पैदल नहीं पार करना पड़ेगा। 70 मिनट के पैदल सफर को रज्जुमार्ग से सिर्फ 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। काली मंदिर से मुख्य मंदिर की दूरी महज 200 मीटर है। समय की बचत के अलावा पहाड़ में चलने में अक्षम लोग, बड़े-बुजुर्ग, छोटे बच्चे और विकलांग भी आसानी से देवी मां के दर्शन कर सकेंगे। मां पूर्णागिरि धाम के पुजारियों का कहना है कि रज्जुमार्ग से अधिक तीर्थयात्रियों की आसानी से पहुंच हो सकेगी और धाम को भी प्रसिद्धि मिलेगी।
कोट
मृदा परीक्षण की रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें पूणागिरि की चट्टान को रज्जुमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त और सुरक्षित बताया गया है। अब कंपनी को तुरंत काम करने को कहा गया है। काम में देरी पर कंपनी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी, चंपावत।
रज्जुमार्ग परियोजना से संबंधित खास बिंदु:
1. हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक 903.225 मीटर लंबाई के रोपवे का 10840 वर्ग मीटर का कोरिडोर एरिया है।
2. ठुलीगाड़ में प्रशासनिक भवन, पार्किंग, कमरे आदि बनेंगे।
3. लोअर टर्मिनल में रोपवे स्टेशन भवन, यात्री होल्डिंग एरिया, टिकट काउंटर, प्रशासनिक कार्यालय और सेवा एरिया, सार्वजनिक सहूलियत होंगी। जबकि मुख्य मंदिर के पास अपर टर्मिनल बनेगा।
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4. सुरक्षा के लिए खास तकनीक का उपयोग होगा।
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