फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वन विभाग की कार्यशैली पर फिर खड़े हुए सवाल

Wed, 22 Nov 2017 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)।
विज्ञापन
घटना स्थल पर पहुंचे लोग। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बाघ के हमले से नौ माह में चौथी महिला की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले हुई तीन घटनाओं के बाद वन विभाग ने शारदा व बूम रेंज में हमलावर बाघ की पहचान कर उसे पकड़ने के लिए सीसी कैमरों के साथ ही पिंजरे भी लगाए थे, लेकिन हमलावर बाघ को पकड़ना तो दूर विभाग उसकी पहचान तक नहीं कर पाया है।
विज्ञापन


हल्द्वानी व चंपावत वन प्रभाग के आबादी से लगे जंगलों में वन्यजीवों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जंगल से लगे गांवों में वन्यजीवों का ऐसा खौफ बना हुआ है कि रात में ही नहीं दिन में भी वन्यजीवों से भयभीत रहते हैं। गांवों में कभी तेंदुए तो कभी बाघ के दिखाई देने से लोग वैसे ही दहशत में जी रहे हैं, ऊपर से बाघ के लगातार महिलाओं को मारने की घटनाओं ने खौफ और बढ़ा दिया है।

लेकिन वन विभाग के पास सिवाय गश्त के वन्यजीवों से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई साधन-संशाधनों का न होना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। बता दें कि इस ताजा घटना से पहले बाघ ने 26 फरवरी को शारदा रेंज के द्वान वीट के जंगल में बोरागोठ निवासी केशर राम की पत्नी सोना देवी (55), इसी वीट में 25 अप्रैल को आमबाग निवासी वन कर्मी धन सिंह की पत्नी राधा (46) और चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज में गत 24 जून को बाघ ने बस्तिया की जानकी देवी को निवाला बनाया था।
विज्ञापन


इतना ही गत आठ अप्रैल को एक बाघिन भी बस्तिया गांव में घुस आई थी, जो करीब 48 घंटे तक गांव में बगीचे में डेरा जमाए रही, लेकिन वन विभाग न सिर्फ गांव में घुसी इस बाघिन को बल्कि हमलावर बाघ को भी पकड़ने में नाकाम रहा है। इन घटनाओं के बाद विभाग ने हमलावर बाघ की पहचान कर उसे पकड़ने की लंबी कवायद भी की, जो नकारा साबित हुई है। दरअसल विभाग के पास वन्य जीवों से सुरक्षा के कोई विशेष इंतजाम ही नहीं है। जंगल में सीसी कैमरे लगाए गए तो फुटेज देखने की व्यवस्था ही नहीं थी।

हमलावर बाघ को आदमखोर घोषित किया जाए
नौ माह के अंदर हल्द्वानी वन प्रभाग के शारदा रेंज एवं चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज में बाघ के हमले में महिला की मौत की चौथी घटना से लोगों में खासा गुस्सा बना हुआ है। उन्होंने लगातार हो रही घटनाओं के लिए वन विभाग की लचर कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराते हुए हमलावार बाघ को आदमखोर घोषित कर उसे मारने की मांग उठाई है।

जिला पंचायत सदस्य उर्मिला चंद, ग्राम प्रधान सुरेश सिंह महर, रेनू देव, नवीन सिंह, सतीश पांडेय, पूर्व प्रधान जीत सिंह, कमला चंद, शिवराज चंद, दीपक पाठक, पूर्व पालिकाध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह रावत, आनंद सिंह महर आदि ने कहा है कि तीन घटनाओं के बाद भी वन विभाग ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए, जिसका नतीजा है कि आज एक और महिला को बाघ का निवाला बनना पड़ा है। उन्होंने शीघ्र सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

वन संरक्षक के रोकने पर रुक जाती तो टल सकती थी घटना
वन विभाग की माने तो यदि मृतका व उसके साथ जंगल गई महिला ने वन रक्षक की बात मान ली होती तो मृतका हेमा बाघ का निवाला नहीं बनती। शारदा रेंज के उप प्रभागीय वनाधिकारी के मुताबिक मृतका हेमा बुधवार को दिन में दूसरी बार पशुओं के लिए चारा लेने जंगल गई थी।

मृतका हेमा देवी, राधा देवी व पार्वती देवी जब पहले चक्कर सुबह करीब 11 बजे जंगल जा रही थी कि तो वन रक्षक सुरेंद्र महरा ने उन्हें जंगल में बाघ का मूूवमेंट होने की जानकारी देते हुए जंगल जाने से रोका था, लेकिन वे नहीं मानी। इसके बाद वे दोपहर के वक्त फिर दुबारा जंगल गई तो बाघ का शिकार बन गई।

विभाग तत्काल देगा आर्थिक सहायता: एसडीओ
बाघ के हमले में मृत हेमा देवी के परिवार को वन विभाग तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि घटना से प्रभागीय वनाधिकारी डा. चंद्रशेखर सनवाल को अवगत करा दिया गया है। उनके निर्देश पर पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को विभाग द्वारा पीड़ित परिवार को सहायता राशि प्रदान कर दी जाएगी।

विधायक गहतोड़ी ने घटना पर जताया दुख
क्षेत्रीय विधायक कैलाश गहतोड़ी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वन विभाग की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मृतक महिला के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दिलाने के साथ ही वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए जंगल और गांवों की सीमा पर जल्द सुरक्षा उपाय कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित क्षेत्र में वन्यजीवों से सुरक्षा की योजना को शीघ्र शुरू कराया जाएगा, लेकिन तब तक वन विभाग के उच्च अधिकारियों को वन्यजीवों से सुरक्षा के पुख्ता वैकल्पिक उपाय सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना के वक्त घर में अकेला था बेटा कैलाश
बाघ का निवाला बनी हेमा देवी के घर में घटना के वक्त अकेला उसका पुत्र कैलाश ही मौजूद थे। पति मोहन सिंह पूजा के लिए अपने पैतृक गांव बागेश्वर गए हैं तो छोटी पुत्री स्नातक की पढ़ाई के लिए देहरादून में है। दो बहनों में बड़ा पुत्र कैलाश मर्चेंट नेवी में कार्यरत है, जो इन दिनों छुट्टी पर घर आया है। मां की मौत की खबर मिलने के बाद भी कैलाश हिम्मत के साथ पोस्टमार्टम की कार्रवाई में सहयोग करता नजर आया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें