खोखा-फड़ सहित छोटे तबके के कारोबारी भी केंद्रीय बजट में अपने हितों के लिए ठोस कदम उठाता देखना चाहते हैं। उनका कहना है कि कमजोर आर्थिक हालत की वजह से बजट में उन्हें अनदेखा किया जाता है। सिर्फ बड़े कारोबारी और उद्योगपतियों पर फोकस किया जाता है। इस बार ये तस्वीर बदलनी चाहिए।
बने हितकारी नीति
फड़ कारोबारी केशव जोशी का कहना है कि बजट में छोटे कारोबारियों, खोखा-फड़ वालों के रोजगार को बढ़ाने के लिए स्पष्ट नीति हो। ताकि प्रशासनिक दखल से उन्हें राहत मिल सके।
उत्थान की योजना जरूरी
लीलांबर का कहना है कि निम्न श्रेणी के व्यापारियों के उत्थान के लिए योजना बने। उन्हें निचले स्तर पर पुलिस और पालिका के डंडे की चपेट में आना पड़ता है, जिससे उन्हें निजात मिलनी चाहिए।
न हो अनावश्यक दखलंदाजी
जगदीश नाथ का कहना है कि प्रशासन और पालिका के अनावश्यक हस्तक्षेप से छोटे कारोबारियों को रोजमर्रा की झिकझिक झेलनी पड़ती है। इस स्थिति को सुधारने के लिए स्पष्ट नीति बने।
रियायती कर्ज की व्यवस्था हो
राकेश कुमार का कहना है कि रोज कमाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले व्यापारियों के लिए बजट में रियायती दर पर कर्ज की व्यवस्था हो। साथ ही बैंक भी कर्ज देने में अनावश्यक हीलाहवाली न करें।
ठीक व्यवहार हो
नदीम हुसैन का कहना है कि खोखा-फड़ कारोबारियों से तहबाजारी तो वसूली जाती है, मगर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। स्वाभिमान के साथ कारोबार करने लायक माहौल बनाने के लिए नीति बने।