चंपावत। जिला मुख्यालय के छीड़ापानी में स्थित शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र में पहली बार रेनबो ट्राउट मछली के 15 लाख से अधिक अंडों की ब्रीडिंग की जा रही है। केंद्र को गत वर्ष दस लाख अंडों की ब्रीडिंग का लक्ष्य दिया गया था। इस बार केंद्र सरकार की ओर से लक्ष्य को बढ़ा कर 15 लाख कर दिया गया है। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. कुणाल किशोर के अनुसार केंद्र में कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, गोल्डन कार्प आदि मत्स्य प्रजातियों के साथ ही रेनबो ट्राउट मछली की प्रजाति पर व्यापक अनुसंधान कार्य किया जा रहा है।
रेनबो ट्राउट मछलियों के अंडों को उत्तर भारत के चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर सहित पूर्वाेत्तर राज्यों को भेजा जाएगा। वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की ओर से करीब तीन करोड़ की लागत से एक्वा प्लांट लगाने का कार्य किया जा रहा है। संवाद
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पहली बार निजी काश्तकार की हैचरी में तैयार होंगे मत्स्य बीज
चंपावत। जिले में छीड़ापानी अनुसंधान केंद्र की ओर से अंडों की ब्रीडिंग के लिए पहली बार निजी काश्तकार की ओर से विकसित की गई हैचरी की सहायता भी ली जाएगी। इसके लिए केंद्र की ओर से नरियालगांव में आईबी से सेवानिवृत्त खिलानंद जोशी की ओर से तैयार की गई हैचरी की मदद ली जाएगी। संवाद
कोट
छीड़ापानी अनुसंधान केंद्र की ओर से ठंडे पानी में रहने वाली मछलियों की विभिन्न प्रजातियों पर लगातार शोध कार्य किया जा रहा है। केंद्र को पहली बार रेनबो ट्राउट के 15 लाख अंडों को तैयार करने का लक्ष्य मिला है। जिसे पहली बार केंद्र और निजी काश्तकार की हैचरी के माध्यम से पूरा किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. कुणाल किशोर, प्रभारी, छीड़ापानी शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र, चंपावत।