नगर में पीने के पानी की समस्या विकराल रूप ले रही है। हाड़ कंपा देने वाले ठंड के मौसम में पेयजल के लिए लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बीते पांच महीनों से बारिश नहीं होने के कारण यहां अधिकांश जल स्रोतों का जल स्तर लगातार कम हो रहा है। इस कारण लोगों को तीसरे दिन बमुश्किल 100 लीटर पानी ही मिल पा रहा है।
16.5 लाख लीटर पानी नगर की रोजाना की जरूरत है, मगर जल संस्थान 4.75 लाख लीटर पानी ही आपूर्ति करा पा रहा है। लोगों को तीसरे दिन तो पानी मिल रहा है, मगर वह भी अपर्याप्त। नागरिकों का कहना है कि उन्हें मात्र 40 मिनट ही पानी मिल रहा है, लेकिन कई मोहल्लों में पांचवें और छठे दिन पानी मिल रहा है। लोगों में इतना आक्रोश है कि पेयजल वितरण कार्य में लगे लोग अपने फोन स्विच ऑफ किए रहते हैं। उनका कहना है कि एक तरफ पानी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें लोगों का आक्रोश झेलना पड़ रहा है।
नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सुमन माहरा, कांग्रेस कार्यकत्री देवकी फर्त्याल, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष विमला मेहरा आदि का कहना है कि पानी की किल्लत से महिलाओं का काफी समय पानी ढोने में बर्बाद हो रहा है। दूसरी ओर लोगाें ने हर घर में टुल्लू पंप लगाए हैं, उससे काफी लोगों के घरों में पानी का प्रेशर नहीं होने से संकट पैदा हो रहा है। जल संस्थान इस स्थिति को नहीं रोक पा रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष लता वर्मा ने टैंकरों से जलापूर्ति करने की मांग की है।
बनस्वाड पेयजल योजना की लाइन को कुछ नीचे करने से आंशिक सुधार हुआ है, लेकिन जल स्रोतों का जल स्तर कम होने से पानी का संकट बना है। यदि यही स्थिति रहती है, तो संस्थान टैंकरों से पानी ढोकर टंकियों में डालकर वितरण कर रहा है।
-विशाल सक्सेना, अभियंता, जल संस्थान, लोहाघाट।