इन दिनों चंपावत जिला अलर्ट पर है और 31 दिसंबर से शुरू ये अलर्ट 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस तक रहेगा। जिले की 90 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगी हुई है। ऐसे में पंजाब के पठानकोट एयरबेस में आतंकी वारदात के बाद सीमा पर सतर्कता को और पुख्ता करने का दावा किया गया है। लेकिन सुरक्षा की इन तमाम विशेष एहतियात के लिए जिले में पुलिस बल नाकाफी है।
दो कोतवाली, छह थानों के अलावा दो महत्वपूर्ण पुलिस चौकी वाले चंपावत जिले को चलाने के लिए इस वक्त महज दो निरीक्षक और 13 दरोगा हैं। हाल यह है कि नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर कोतवाली बगैर कोतवाल के है। पूरी जिम्मेदारी इकलौते दरोगा के कंधों पर है। इसके अलावा चार थाने (नेपाल सीमा से लगे तामली, जिले के प्रवेशद्वार बनबसा, श्रीरीठा साहिब और पाटी) में महज एक-एक दरोगा हैं। क्षेत्र पर निगरानी रखने के लिए सिपाहियों की संख्या भी नामभर की है। ऐसे में अलर्ट की बावजूद कैसे पैनी निगरानी रखी जा सकेगी? यह बड़ा सवाल है। खासकर तब, जब जिले की 90 किमी सीमा नेपाल से लगी है। वहीं पुलिस का मानना है कि सीमा पर एसएसबी के 20 बॉर्डर आउटपोस्टों से पूरी नजर रखी जा रही है।
दरोगा बगैर है हाईवे की रिपोर्टिंग चौकी
टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर चल्थी की बेहद महत्वपूर्ण पुलिस चौकी है, लेकिन यहां के दरोगा विनोद जोशी की कुंभ ड्यूटी के बाद से यह चौकी इंचार्ज के बगैर है। इसके अलावा दूरस्थ डांडा की पुलिस चौकी भी उप निरीक्षक के बगैर है। साथ ही दो में से एक (टनकपुर का) फायर सर्विस सेंटर बगैर फायर सर्विस ऑफिसर के हैं।
अर्द्धकुंभ ड्यूटी पर गए 107 पुलिस कर्मी
हरिद्वार अर्द्धकुंभ ड्यूटी में जिले के 107 पुलिस कर्मी गए हैं। इनमें से एक सिपाही की तो दो दिन पूर्व मौत भी हो चुकी है। चार दरोगा, एक फायर सर्विस ऑफीसर सहित कुल 107 पुलिस, खुफिया कर्मी हरिद्वार में ड्यूटी दे रहे हैं। वहीं, जिले में 496 पुलिस कर्मियों में से पहले ही 74 कम थे। अब 107 के ड्यूटी पर जाने से कर्मियों की तादात में और भी कमी आई है।
मेला ड्यूटी की वजह से पुलिस बल में कमी जरूर हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस कर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं। बाहरी, अजनबी और संदिग्ध तत्वों पर खास नजर रखी जा रही है। होली बाद शुरू होने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मेले के लिए हरिद्वार गए जिले के पुलिस बल को वापस बुलाने के लिए मुख्यालय पत्र भेजा जाएगा।
- दिलीप सिंह कुंवर, पुलिस अधीक्षक, चंपावत।