जिले में पांच नदियों काली, गोरी, धौली, रामगंगा, सरयू नदी के संगम पंचेश्वर की महाकाली नदी सुनहरी महाशीर की पसंदीदा जगह है। वन विभाग और स्वयंसेवी संस्था दृष्टिकोण की ओर से यहां नौ वर्षों से मत्स्य आखेट (एंगलिंग) प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस कारण पंचेश्वर को देश-विदेश में पहचान मिली है।
दृष्टिकोण संस्था के निदेशक साकेत दास के अनुसार पंचेश्वर में इको टूरिज्म को बढ़ाने की पहल रंग लाने लगी है। अब विदेशी एंगलरों (आखेटकों) की यहां बराबर आवाजाही होने लगी है। प्रभागीय वनाधिकारी एके गुप्ता का कहना है कि एंगलिंग के दौरान महाकाली नदी से पकड़ी गई मछलियों का शिकार नहीं किया जाता, बल्कि पकड़ी गई मछलियों का वजन, मोटाई, लंबाई आदि का मापन करने के बाद एंगलर मछली को नदी में छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि एक अध्ययन में महाकाली नदी में गोल्डन महाशीर की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी है।
पंचेश्वर में नौवीं मत्स्य आखेट प्रतियोगिता शुरू
पंचेश्वर में वन विभाग और दृष्टिकोण संस्था की ओर से आयोजित नवीं एंगलिंग मीट (मत्स्य आखेट प्रतियोगिता) शुरू हो गई है। शनिवार को शुरू हुई इस एंगलिंग मीट में चार विदेशी एंगलरों के साथ ही दस प्रतिभागी शामिल हैं। जिसमें यूनाइटेड किंगडम के राबर्ट बुरडाक, फिलिप नेवलिव डेजेन, एलिसन फोस्ट, क्रिस्टोफर स्टीफन समेत काठमांडू नेपाल के सचिन प्रकाश, गुड़गांव हरियाणा के पॉल टोंक, अहमदाबाद गुजरात के जहांगीर वकील, गुवाहाटी असोम के दोरेंद्र सिंह, इंफाल मणिपुर के कर्नल जी शर्मा, नई दिल्ली के अजय एरिक शामिल हैं। प्रतियोगिता का समापन 29 अक्तूबर को होगा।
राफ्टिंग के लिए भी पर्यटन मानचित्र में बनाई जगह
मत्स्य आखेट के अलावा पंचेश्वर ने रिवर राफ्टिंग के लिए भी पर्यटन मानचित्र में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है। पंचेश्वर से टनकपुर तक महाकाली नदी का बहाव राफ्टिंग के लिए बेहद अनुकूल है। यहां भारतीय सेना, एसएसबी, आईटीबीपी, पुलिस समेत स्वयंसेवी संगठनों की ओर से समय समय पर रिवर राफ्टिंग अभियान संचालित किए जाते हैं।