चंपावत जिले में वन विभाग में 57 वनाग्नि की घटनाएं हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग के पास वनाग्नि के 109 मामले हैं। इसमें लोहाघाट अग्नि शमन के पास 62 वनाग्नि की सूचनाएं आई हैं। जबकि टनकपुर अग्निशमन के पास 47 वनाग्नि की सूचनाएं आई है। टनकपुर में सभी जगह अग्निशमन ने समय से पहुंचकर आग पर काबू पाया। जबकि लोहाघाट अग्निशमन को 62 स्थानों में आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वनाग्नि की घटनाओं के चलते सबसे अधिक नुकसान कीट, पतंगे, पक्षियों, जंगली जानवरों को काफी नुकसान पहुंचा है। इनके नुकसान का आंकलन विभाग के लिए करना संभव नहीं है।
वनकर्मियों की जंगलों बीच गुजर रही रात, वहीं खा रहे खाना
गांव में आग बुझाने वाले नहीं
वनाग्नि की आग बुझाने वाले गांव में कोई नहीं है। वर्तमान में जंगलों आग को सिर्फ गांव में देखने वाले रह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुख सुविधाओं के आभाव में लोगों ने गांव से पलायन कर लिया है। अब गांवों ज्यादातर बुजुर्ग ही बचे हैं। उनके लिए जंगलों की आग बुझाना संभव नहीं है। जहां लोग हैं तो वह सिर्फ आग को दूर से देख रहे हैं कि आग कहां तक पहुंची गई। कई तो आग लगने की जानकारी भी नहीं दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उनके लिए यह सामान्य सी बात है। बुजुर्ग भीम राम का कहना है कि पहल जहां जंगलों में आग लगती थी तो ग्रामीण उसके बुझने तक नजर रखते थे। अब तो जंगलों से बस धुंआ निकलता हुआ दिखता है तो भी कोई मौके पर जाकर नहीं देखता है। खेतीबाड़ी भी लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण कम कर दी है। ऐसे में जंगलों की आग को बुझाने कोई नहीं आता है।