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स्वांला के पास वायरमैट में लगी आग

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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में स्वांला के पास पत्थरों को गिरने से रोकने के लिए बिछाए व? - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर स्वांला के पास सोमवार तड़के भूस्खलन और पत्थरों को गिरने से रोकने के लिए बनाए गए वायरमैट (लोहे की ड्रिल के साथ बनी जूट की जाली) में आग लग गई। करीब दस हजार वर्गमीटर क्षेत्र में लगी आग से तीन करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का अनुमान है। 37 किलोमीटर दूर लोहाघाट से पहुंची अग्निशमन की टीम ने आग पर काबू पाया। आग लगने की वजह का अब तक पता नहीं चल सका।
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कोतवाल धीरेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार तड़के करीब दो बजे एनएच पर स्वांला पहाड़ी के पास वायरमैट में आग लगी। धधकी आग से 130 मीटर लंबाई और 75 मीटर ऊंचाई वाली वायरमैट का ज्यादातर हिस्सा जल गया। सूचना पर लोहाघाट से अग्निशमन अधिकारी श्याम बहादुर थापा के नेतृत्व में अग्निशमन दस्ता और चल्थी पुलिस चौकी के प्रभारी हेमंत कठायत के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद टीम आग पर काबू पा सकी। इस स्थान से कुछ ऊंचाई पर स्कूल और अस्पताल भी है अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। निर्माण करा रही शिवालय कंपनी के प्रबंधक सुरेंद्र राणा ने आग से तीन करोड़ 68 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। तड़के करीब 6 डिग्री सेल्सियस के तापमान में आग की वजह पहेली बनी हुई है। अंदेशा जताया जा रहा है कि कुछ शरारती तत्वों ने पेट्रोल छिड़क कर इस हरकत को अंजाम दिया होगा। टीम में बालमुकुंद राणा, गोविंद पनेरू, भूपेंद्र सिंह, प्रमोद, भारत बोरा, जगदीश तिलाड़ा, हीरा सिंह, चामू सिंह शामिल थे।
फोटो 09 सीपीटी 11पी से 14पी तक
कोट.....
लैंसलाइड प्रोटेक्शन मार्ग के पहाड़ी वाले हिस्सों में वायरमैट लगाई गई है, जहां मलबा, मिट्टी और पत्थर के बहुत कठोर नहीं होने के कारण गिरने का खतरा रहता है। जूट मैटिंग से इसे जालीनुमा बनाया जाता है। इसमें जगह-जगह ड्रिल कर लोहे की रॉड को फंसाया जाता है। इस सब काम के लिए काफी वक्त लगता है। स्वांला के पास करीब दस हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फिर से बचाव के कार्य को कराने में चार से पांच सप्ताह का समय लगेगा। -एलडी मथेला ईई, एनएच खंड लोहाघाट।
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आग से बचाव के लचर इंतजामों की फिर खुली पोल
चंपावत। नवंबर के 10 दिन भी नहीं बीते हैं और आग की दो बड़ी वारदात हो गईं। इन दोनों अग्निकांड़ों ने आग से बचाव के लचर इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। चंपावत में आग की कोई घटना होने पर उसे बुझाने की जिम्मेदारी 15 किमी दूर लोहाघाट के फायर स्टेशन पर आती है। वहां से दमकल की गाड़ी पहुंचने में 20 से 25 मिनट चले जाते हैं। दरअसल, राज्य बनने के 20 साल बाद भी चंपावत में फायर स्टेशन नहीं है।
सोमवार तड़के भी ऐसा ही हुआ। लोहाघाट से 37 किमी दूर स्वांला अग्रिशमन दस्ते को पहुंचने में करीब सवा घंटा लगा। सिर्फ चंपावत ही नहीं, पांच तहसील वाले इस जिले में बाराकोट और पाटी तहसील में भी फायर स्टेशन नहीं हैं। ये सभी पहाड़ी क्षेत्र पूरी तरह से लोहाघाट पर आश्रित है। इधर एसपी लोकेश्वर सिंह का कहना है कि चंपावत के लिए फायर स्टेशन का प्रस्ताव जिला मुख्यालय से पूर्व में भेजा गया था। शासन स्तर पर प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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