पाटी (चंपावत)। कुछ समय बारिश के चलते जंगलों की आग शांत होने के बाद दोबारा जंगल आग की भेंट चढ़ने लगे हैं। इसके तहत पाटी के प्याली, धूरा, गूम के जंगलों में भीषण आग लग गई। वन विभाग को आग लगने की सूचना देने के बावजूद वन कर्मियों के न पहुंचने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई है। जंगल में आग लगने से करीब डेढ़ हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।
मंगलवार की रात को इन गांवों के जंगलों में आग भड़क गई। हवा के साथ तेजी के साथ आग ने जंगल को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने से छोटे, बड़े पेड़ पौधों के अलावा वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। ग्राम प्रधान हेम शर्मा और सरपंच नरेश भट्ट ने बताया कि आग इतनी भयंकर थी कि मनरेगा से ग्राम पंचायत में लगाए गए सहतूत, बांज, केकड़ के 400 पौधे आग की चपेट में आ गए। प्रधान ने बताया कि ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू किया। प्रधान ने आरोप लगाया कि वन विभाग को आग लगने की सूचना देेने के बावजूद कोई भी वन कर्मी आग बुझाने के लिए नहीं पहुंचा। इससे लोगों ने वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी जताई।
पिथौरागढ़ में फिर आग से धधकने लगे जंगल
पिथौरागढ़/थल। दो दिन मौसम साफ रहने के बाद तपिश बढ़ते ही फिर सीमांत जिले के जंगल आग से धधकने लगे हैं। जंगलों की आग से प्राकृतिक वन संपदा को काफी नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही वन्य जीवों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर पलेटा मल्लाखूना के जंगलों में दो दिनों से आग लगी हुई। शाम के समय तेज हवा के चलने के कारण आग और अधिक विकराल होती जा रही है। थल क्षेत्र में बीते दिनों हुई बारिश से जंगलों की आग पूरी तरह बुझ गई थी मंगलवार शाम सात बजे फिर क्षेत्र के तीन जंगलों में भीषण आग लग गई। वन पंचायत दड़मोली, लेजम ग्राम पंचायत के तोक वन पंचायत कमद तथा वन विभाग के कालीनाग के जंगल में शाम से ही आग लगी और रात होते ही आग ने विकराल रूप ले लिया जिससे पूरी रात तीनों जंगल धू धू कर जलते रहे। वन पंचायत समिति और वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने नहीं पहुंचे। वनाग्नि से जहां तीनों जंगलों की वन संपदा खाक हो गई है, वहीं तापमान बढ़ने से प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है।