चंपावत। खेतीखान क्षेत्र में इन दिनों जंगली जानवरों का आतंक चरम पर है। आए दिन जंगली जानवर उनके खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं और बाजार क्षेत्र में छोड़े गए पालतू जानवर भी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस कारण ग्रामीण धीरे-धीरे खेती पर निर्भरता कम कर रहे हैं और खेती-बाड़ी छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
खेतीखान क्षेत्र के पार गोशनी, कापड़ी गांव, सुनार गांव, खतेड़ा गांव के लोगों का जीवन मुख्य तौर पर खेती और पशुपालन पर ही निर्भर है। किसान बंदरों और जंगली सूअरों के उत्पात से परेशान हैं, जो रात के समय खेतों में घुसकर फसल बर्बाद कर देते हैं। यह संकट केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जनजीवन को भी प्रभावित कर रहा है। सरकार और वन विभाग को इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि पहाड़ों की कृषि विरासत और गांवों को बचाया जा सके।
सीडीओ डॉ. जीएस खाती ने बताया कि पलायन रोकने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को खेती के लिए प्रेरित कर रही है। कृषि और उद्यान विभाग के माध्यम से तारबाड़ सोलर फेंसिंग के काम किए जा रहे हैं।
कोट रबी की फसलें लगाने का समय है। इस समय खेतों में गेहूं, मसूर और हरा मटर लगाया गया है। जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा करने में ही अधिकांश समय चला जाता है। - रमेश चंद्र कापड़ी, किसान, कापड़ी गांव
पालक, मैथी, जौंत की फसल खेतों में उगाई गई है। जंगली जानवरों के फसलों को नुकसान पहुंचाने के कारण उनकी जेब पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है। सरकार को तार-बाड़, सोलर फेंसिंग जैसे प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह प्रयास अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। - सागर मिश्रा, किसान, पार-गोसनी
जंगली जानवरों के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है। इस कारण लोगों की खेती पर निर्भरता कम हो रही है, कई जगहों पर बचाव के लिए तारबाड़ लगाई है, लेकिन ठोस नीति बनाने की जरूरत है। -रेनू वर्मा, ग्राम प्रधान, गोसनी