लोहाघाट में माल्टा से लदे पेड़। संवाद
लोहाघाट (चंपावत)। क्षेत्र में सिटरस प्रजाति के फलों का किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसान औने-पौने दामों में बिचौलियों को अपने फल बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सिटरस फलों की खरीद के लिए स्थानीय स्तर पर कोई मंडी न होने से किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
लोहाघाट के गुमदेश, पंचेश्वर, पुलहिंडोला, चमदेवल, कोटला, खीड़ी, ढोरजा, फोर्ती, बिशंग, चौड़ी बलांई आदि क्षेत्रों में माल्टा, बड़ा नींबू और संतरा पैदा होता है लेकिन यहां के किसानों को इनका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। किसान माल्टा को छह से आठ रुपये, बड़ा नींबू छह रुपये किलो और संतरा 25 से 50 रुपये किलो तक बेच जा रहे हैं। काश्तकार रमेश सिंह, प्रकाश का कहना है कि अब सिटरस फलों की खेती करना भी घाटे का सौदा हो रहा है। दूर गांवों से लोहाघाट बाजार तक फलों को लाने में ही काफी खर्चा आ जाता है। इसके बाद बिचौलियों के हाथ औने-पौने दामों में अपने फलों को बेचना पड़ता है। संवाद