चंपावत। कोविड-19 महामारी की आड़ में वाहनों की खूब चांदी कट रही है। ज्यादातर टैक्सियों में सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार कर सभी सीटों पर यात्रियों को बिठाया जा रहा है, लेकिन किराया दोगुना वसूला जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो फिर भी पुलिस व परिवहन विभाग छिटपुट कार्रवाई कर रहा है, लेकिन ग्रामीण मार्गों पर नियमों को ताख पर रखकर मुसाफिरों की जेब काटने का धंधा बेधड़क चल रहा है। इससे यात्रियों की जेब कटने के साथ ही कोरोना महामारी का अंदेशा भी बढ़ा है। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के लोगों ने तो इसको लेकर कड़ा एतराज जताते हुए डीएम को पत्र भेजा है।
जिले में मंच, तामली, रौसाल, भिंगराड़ा, रीठा, सिप्टी, बाराकोट आदि क्षेत्रों के लोग आवाजाही के लिए सिर्फ टैक्सियों पर आश्रित हैं। कोरोना काल में इन रूटों के मुसाफिर बेहाल हैं। तामली के ग्रामीणों ने तो किराए की इस बढ़ोतरी पर बाकायदा एतराज जताते हुए डीएम को पत्र भेजा है। कहा कि 50 किमी दूर तामली का किराया 120 रुपये था, जो अब बढ़कर 250 रुपये हो गया है, लेकिन जीपों में सवारियां पहले की तरह ही ले जाई जा रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि ज्यादातर लोग कमजोर वर्ग के हैं। वे अधिक किराया देने को मजबूर हो रहे हैं। पत्र में उन्होंने अविलंब मनमाने किराये पर अंकुश लगाने की मांग की गई है।
कोट
चंपावत-मंच-तामली मार्ग पर आवाजाही के लिए सिर्फ टैक्सियां ही माध्यम हैं। कोरोना के चलते इन दिनों ग्रामीण अधिक किराया देकर सफर करने को मजबूर हैं। पहले वे 120 रुपये देकर यात्रा करते थे और अब उसी सफर का 250 रुपये दे रहे हैं।
भुवन जोशी, तामली।
चंपावत से करीब 18 किमी दूर अमकड़िया के लिए पहले 60 रुपये देने पड़ रहे थे। अब किराया तो दोगुना हुआ लेकिन टैक्सियों में यात्री आधे नहीं हुए। इससे जेब तो कट ही रही है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
प्रकाश जोशी, अमकड़िया
किराये की दर (रुपये में):
यात्रा रूट पहले अब
चंपावत-लोहाघाट 50 100
चंपावत-टनकपुर 250 500
चंपावत-पिथौरागढ़ 250 500
चंपावत-खेतीखान 75 150
चंपावत-रीठा साहिब 250 500
कोट....
कोविड-19 की महामारी के चलते सभी वाहन संचालकों को निर्धारित क्षमता की 50 प्रतिशत सवारी ले जाने के आदेश दिए गए हैं। इस वजह से किराया दुगुना किया गया है। कुछ जगह नियमों का पालन न करने की शिकायतें मिली हैं, जिस पर परिवहन विभाग छापा मारकर कार्रवाई कर रहा है।
रश्मि भट्ट, एआरटीओ, टनकपुर।
रोडवेज बसों में भी सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी
चंपावत। निजी वाहन ही नहीं, उत्तराखंड रोडवेज की बस भी कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर बेपरवाह हैं। रविवार को भी लोहाघाट-हल्द्वानी बस सेवा में निर्धारित क्षमता की 80 प्रतिशत यात्री बस में सवार थे। यहां तक कि दो यात्रियों वाली सीट में भी दो-दो यात्री चिपक कर बैठे थे। वहीं एजीएम राजेंद्र कुमार का कहना है कि बसों में सोशल डिस्टेंसिंग व सैनिटाइजर का प्रयोग करने को कहा गया है। इसके बावजूद अनदेखी होने पर मामले को देखा जाएगा।