एनएच में दैवी आपदा के दौरान आपदा प्रबंधन से निपटने के दावे अब तक खरे नहीं उतरे हैं। मानसून के दौरान संभावित आपदा और मलबा आने से बंद एनएच को खोलने के लिए विभाग की ओर से पर्याप्त मैनपावर के साथ ही विभिन्न स्थानों पर जेसीबी सहित अन्य जरूरी उपकरण तैनात किए गए हैं, लेकिन बीते बीस दिनों में हुई बारिश के कारण चल्थी के पास मलबे ने यातायात की राह रोक ली।
20 जून को आई बारिश से जहां चल्थी के पास करीब पांच घंटे तक यातायात ठप रहा। वहीं एक जून को आई बारिश की वजह से एनएच पर चल्थी पुल के पास भारी मात्रा में भूस्खलन होने के कारण पूरे चौबीस घंटे तक यातायात अवरुद्ध रहा, जबकि जिला प्रशासन की ओर से समय रहते अवरुद्ध सड़कों को युद्ध स्तर पर खोलने के लिए सभी प्रकार की जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए गए थे। एनएच बंद होने से जहां यात्रियों को दिक्कतें हुई, वहीं उत्तराखंड परिवहन निगम को करीब 15 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा है।
नहीं हो सका आपदा प्रबंधन का मॉकड्रिल
जिले में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से मानसून से पहले बचाव और राहत कार्यों के लिए निर्धारित मॉकड्रिल (पूर्वाभ्यास) तक नहीं हो सका है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय के अनुसार जिले में मॉकड्रिल की सभी तैयारियां पूरी की गई थी, लेकिन तब वनों में लग रही आग के कारण पैदा हुए संकट के चलते मॉकड्रिल नहीं हो सका।
संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं जेसीबी
एनएच डिवीजन के अवर अभियंता विरेंद्र कुमार के अनुसार टनकपुर से चंपावत के बीच संवेदनशील स्थानों पर सड़क अवरुद्ध होने की दशा में उन्हें खोलने के लिए विभागीय जेसीबी के साथ ही किराए पर जेसीबी तैनात की गई हैं। अमोड़ी और चल्थी में दो जेसीबी, रोलर और कंप्रेशर मशीन रखी गई है।