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हर परीक्षा में फेल हो जाता है सरकारी अस्पताल 

Fri, 08 Dec 2017 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
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लोहाघाट अस्पताल में एक्सरे कक्ष में लटका ताला। - फोटो : अमर उजाला
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 नेपाल सीमा से लगे डुंगराबोरा के पास हुए सड़क हादसे ने एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य सेवा की पोल खोल दी है। डुंगराबोरा से करीब 31 किलोमीटर दूर लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में घायलों को लाया गया। मगर जिले के इस अस्पताल की हालत घायलों को बेहतर उपचार मुहैया कराने के लायक नहीं रही। 
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अस्पताल में जरूरी सुविधा तक नहीं है। दुर्घटना में एक घायल की मौत अस्पताल में, तो दूसरे की मौत उच्च केंद्र ले जाते वक्त हुई। ट्रामा सेंटर शुरू होना तो दूर, अस्पताल में एक्सरे कक्ष तक में बीते 12 महीने से ताला लटका है। वहीं हादसे वाले दिन अस्पताल में महज 3 डॉक्टर मौजूद थे। जबकि 5 डॉक्टर छुट्टी में थे। और एक डॉक्टर ने तो कार्यभार ग्रहण करने के बाद से वापस नहीं आई है। 

प्रभारी मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.एलएम रिखोलिया, डॉ.जितेंद्र जोशी और डॉ.सोनाली अस्पताल में थे।  मुख्य चिकित्साधीक्षक के अलावा सर्जन डॉ.प्रभा जोशी, डॉ.मंजीत सिंह, डॉ.वर्षा रानी व डॉ.चित्रलेखा अवकाश पर थे।  निश्चेतक डा.अभिलाषा कोहली करीब पांच माह पूर्व कार्यभार ग्रहण करने के बाद से दुबारा नहीं आई हैं। अस्पताल में तैनात तीन फार्मेसिस्टों में से दो अवकाश में थे।
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अस्पताल में एक्सरे तक नहीं हो पा रहे हैं। अस्पताल परिसर में ही बने ट्रामा सेंटर का उपयोग भी इलाज के लिए नहीं होता। और इस वक्त भी यहां कार्यालय कक्ष व अल्ट्रासाउंड का काम हो रहा है। घटगाड़ दुर्घटना में एक मृतक की मौत अस्पताल में, तो दूसरे की उच्च केंद्र ले जाने वक्त हुई। लोगों का कहना है कि इस अस्पताल में बेहतर सुविधाएं और व्यवस्थाएं होती तो शायद इनमें से किसी को बचाया भी जा सकता था।

कोट
अस्पताल में एक साथ पांच डॉक्टर कैसे छुट्टी में गए, इसका पता लगाया जाएगा। एक्सरे तकनीशियन नहीं होने से एक्सरे नहीं हो पा रहे हैं। वहीं कार्यभार ग्रहण करने के बाद से दुबारा नहीं आने वाली निश्चेतक के लिए पत्र भेजा जाएगा।
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डॉ.एमएस बोहरा
मुख्य चिकित्साधिकारी
चंपावत। 
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