बारहमासी सड़क पर आठ किलोमीटर में खतरे वाले 21 पेड़ हैं। वहीं इन पेड़ों को हटाने में सरकारी अमला भी उदासीनता बरत रहा है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर बारहमासी सड़क का काम इस साल 30 नवंबर तक पूरा होना है। 150 किलोमीटर लंबी सड़क के पूरा होने के बाद इस मार्ग पर न केवल सुविधाजनक आवाजाही होगी बल्कि वक्त भी कम लगेगा। इस निर्माणाधीन मार्ग में चंपावत-लोहाघाट के बीच तिलौन, मानेश्वर, खूना में ही 21 पेड़ खतरा बने हुए हैं। बारहमासी सड़क पर तिलौन और आसपास के आठ किलोमीटर के दायरे में 21 पेड़ आ रहे हैं।
इन पेड़ों की जड़ें खोखली हो गई हैं या झूल रहे हैं। ये पेड़ तत्काल निस्तारित नहीं होने पर कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। ग्रामीण हरीश पांडेय, शंकर दत्त, उमेश जोशी आदि का कहना है कि इस मार्ग से डर के बीच आवाजाही कर रहे हैं। विभाग से लेकर प्रशासन से गुहार भी लगाई लेकिन पेड़ों को नहीं हटाया गया। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का कहना है कि अधिकारियों को निर्माणाधीन मार्ग में हिफाजत के लिए तत्काल सभी जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।
एनसी पांडेय, सहायक अभियंता, एनएच खंड, लोहाघाट ने बताया कि संयुक्त मुआयने के बाद खतरे वाले पेड़ों को हटाया जाएगा। बारहमासी मार्ग पर काम करा रहे ठेकेदारों को कटिंग और अन्य काम के दौरान पूरी सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। साथ ही जरूरी सुरक्षागत उपाय को पुख्ता करने को भी कहा गया है।
धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक, चंपावत ने बताया कि पुलिस विभाग ने बारहमासी सड़क पर खतरनाक पेड़ और लटके पत्थरों को चिन्हित कर हटाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग खंड को पत्र भेजा है। पेड़ हटाए जाने तक इन स्थानों में चेतावनी बोर्ड लगाने और कर्मियों को तैनात करने को कहा गया है।
तिलौन में दुर्घटना स्थल में दीवार बनाने की कवायद शुरू
रविवार को कार के ऊपर पेड़ गिरने से हुई दो मौतों के बाद दुर्घटनाग्रस्त स्थल तिलौन में सुरक्षा के कदम उठाना शुरू कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड की ओर से दिए गए निर्देश के बाद काम करा रही कंपनी ने तिलौन में मंगलवार को दीवार बनाने के लिए मिट्टी खोदने की कवायद शुरू की है।