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अभियान:आदर्श स्कूलों का ये कैसा आदर्श

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चंपावत आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
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जिला मुख्यालय का जीआईसी जिले के चार आदर्श राजकीय इंटर कॉलेजों में से एक है लेकिन इस कॉलेज को हकीकत में आदर्श बनाए जाने के लिए लंबा सफर तय करना होगा। प्रवक्ताओं और एलटी शिक्षकों के कुल पांच पद लंबे समय से रिक्त हैं। वहीं पूर्णकालिक प्रधानाचार्य भी नहीं है। इससे भी हैरतंगेज यह कि शिक्षकों को लिपिकीय कामकाज भी निपटाना पड़ रहा है।
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2015 में आदर्श कॉलेज का दर्जा मिलने से चार साल पूर्व 2011 से इसे स्मार्ट कक्षा संचालित करने के लिए अनुमन्य किया गया था लेकिन यहां स्मार्ट कक्षाएं कभी नहीं चलीं। स्मार्ट कक्षाओं में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के जरिए शिक्षण कार्य होना था लेकिन इसके लिए न तकनीकी रूप से दक्ष स्टाफ है और न पर्याप्त स्थान मिल पाया। यहां सामान्य तकनीक से पढ़ाने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
11 प्रवक्ताओं में से महज सात हैं। हिंदी, भूगोल, जीव विज्ञान और कामर्स के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। शिक्षक घनश्याम जोशी के सेवानिवृत्त होने के बाद एलटी में भी विज्ञान विषय का पद खाली है। वहीं कॉलेज की लिखा-पढ़त के लिए एक भी बाबू नहीं है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कनिष्ठ सहायक के दोनों पद रिक्त हैं।
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इस जिम्मेदारी को शिक्षक ही निभाने को मजबूर हैं। भूगोल की प्रयोगशाला के हाल भी खराब हैं। इधर सीईओ आरसी पुरोहित का कहना है कि प्रधानाचार्य और दो शिक्षकों का चंपावत तबादला किया गया था लेकिन उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। अब वे अपने स्तर से रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयास करेंगे।
आठ साल में कम हो गए 143 छात्र
चंपावत। 1972 में स्थापित चंपावत जीआईसी में अब प्रवेश को लेकर कतई मारामारी नहीं रहती। लचर बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की कमी से यहां छात्रों की संख्या में लगातार कमी हो रही है। 2011 में यहां 533 छात्र थे। जो अब घटकर 390 तक आ पहुंचे हैं।
आदर्श जीआईसी में चार विषयों के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। वैकल्पिक तौर पर इन विषयों को एलटी शिक्षकों के जरिए पढ़ाया जा रहा है। वहीं एक भी लिपिक नहीं होने से इस कामी को भी शिक्षकों द्वारा करने की मजबूरी है। अलबत्ता स्मार्ट कक्षाओं के लिए हंस फाउंडेशन की मदद से दो कमरे जल्द शुरू किए जाएंगे। मनोज जोशी, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, आदर्श जीआईसी, चंपावत
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