पहाड़ में ई-रिक्शा चलाने की लीड बैंक और भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की पहल को झटका लगा है। तकनीकी वजहों से यह रिक्शा पहाड़ की सड़कों पर नहीं दौड़ सकेगा। लीड बैंक प्रबंधक आनंद सिंह रावत और आरसेटी के निदेशक जनार्दन चिलकोटी ने मौजूदा वित्त वर्ष के शुरू से चंपावत जिले के पहाड़ी हिस्से में ई-रिक्शा की पहल की।
इसके लिए उन्होंने एक कंपनी को राजी कर चंपावत की सड़कों पर ई-रिक्शा का प्रदर्शन किया। रावत बताते हैं कि शुरुआत में ई-रिक्शा तीन पहिए वाला था, लेकिन मोड़ में पलटने के खतरे को देखते हुए इसमें सुधार को कहा गया। पहाड़ की परिस्थितियों के अनुकूल चार पहिये वाले ई-रिक्शा को लाया गया। डीजल-पेट्रोल विहीन इस रिक्शे को बैटरी के सहारे चलाया जाता है।
करीब दो महीने से इस रिक्शे को पहाड़ की सड़कों पर प्रयोग के तौर पर दौड़ाया भी गया। लोगों को प्रेरित करने के लिए यह ई-रिक्शा पाटी, खेतीखान, लोहाघाट सहित पहाड़ के उतार-चढ़ाव भरे कई मार्गों पर चलाया गया। चार लोगों की क्षमता वाले इस ई-रिक्शा के चलने से मुख्य मार्गों से पहाड़ के गांवों वाले मार्गों तक यातायात पहुंच आसान होती। साथ ही इसका उपयोग माल ढुलाई के रूप में मुमकिन होता।
इसके चलने से न केवल लोगों को आवाजाही में सुविधा होती, बल्कि स्वरोजगार भी मिलता, लेकिन लीड बैंक और आरसेटी की ये पहल शुरू होने से पहले ही दम तोड़ गई। लीड बैंक प्रबंधक रावत का कहना है कि एआरटीओ कार्यालय द्वारा पहाड़ के लिए ई-रिक्शा का लाइसेंस नहीं दे रहा है, जिस कारण पहाड़ में इसे चलाना मुमकिन नहीं है।
पर्वतीय मार्गों पर ई-रिक्शा जोखिमभरा होने से अनुमान्य नहीं है। वैसे भी तीन पहिये वाले ई-रिक्शे को ही लाइसेंस जारी किया जाता है। चंपावत में प्रायोगिक तौर पर चलाए जा रहे ई-रिक्शे को मौजूदा नियमों के अंतर्गत लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है।
-रश्मि भट्ट, एआरटीओ, टनकपुर।