टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर मुख्यालय से महज 13 किमी दूर धौन का राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) है, लेकिन यह अस्पताल मरीजों के लिए खुलता कम और ताला अधिक रहता है। मंगलवार के बाद बृहस्पतिवार को भी अस्पताल में ताला लटका रहा। अमर उजाला टीम मंगलवार सुबह 8.39 बजे धौन अस्पताल पहुंची तो वहां एकदम सन्नाटा था। मरीजों को देखने वाला कोई नहीं। अस्पताल के दोनों प्रवेश द्वारों पर ताले लटके थे। 12.35 बजे फिर अस्पताल की हकीकत जानने पहुंचे, तो अस्पताल की सूरत में कहीं कोई बदलाव नहीं। सुबह की तरह दोपहर को भी वैसे ही दोनों गेटों के चैनल में ताले लटके थे। बृहस्पतिवार को भी अस्पताल में ताले लटके रहे।
अस्पताल की तालाबंदी के बीच यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को जानने के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं था। अस्पताल मरीजों के दर्द को कम करने के बजाय जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। धौन और उसके आसपास के गांव के लोगों की त्रासदी यह है कि फर्स्ट-एड के लिए भी चंपावत की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।