बुधवार रात से लगातार बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चंपावत में 80 एमएम बारिश हुई। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) में तीन जगहों पर मलबा आने से सुबह 6 बजे से ढाई घंटे तक आवाजाही ठप रही। मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर के पास अपराह्न करीब एक बजे मलबा आने से करीब 30 तीर्थयात्री फंस गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने सुरक्षित निकाल लिया। शारदा बैराज का जल स्तर फिलहाल 23000 क्यूसेक है। जो खतरे के निशान (एक लाख लीटर क्यूसेक) से काफी नीचे है। लगातार बारिश से चंपावत में सन्नाटा छा गया। आवाजाही भी काफी कम हो गई।
आपदा नियंत्रण कक्ष के मुताबिक एनएच पर फुलारगांव में पेड़ गिरने, धौन तथा बेलखेत-चल्थी के बीच मलबा आने से सुबह राजमार्ग बंद रहा। एनएच ने डोजरों के जरिए मार्ग को आवाजाही लायक बनाया। एनएच के अधिशासी अभियंता मनोहर धर्मसत्तू का कहना है कि धौन से बेलखेत के बीच रूक-रूक कर आ रहे मलबे को हटाने के लिए तीन जेसीबी काम कर रही हैं। उधर लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीसी पंत ने बताया कि रात को मलबा आने से बंद चंपावत-तामली मोटर मार्ग को सुबह खोल दिया गया। छतार में जिला क्षय केंद्र के पास की दीवार बारिश से टूट गई।
पनियां-रीठाखाल तथा लोहाघाट-पंचेश्वर सड़क कुछ समय के लिए बंद हुई। जिन्हें बाद में चालू कर दिया गया। पांच दिन पहले अवरूद्घ हुई कुल्यालगांव-साल सडक मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया है। पाटी-देवीधुरा, छिनकाछीना-सिमलखेत आदि मार्गों में लगातार मलबा गिर रहा है। फिलहाल ये सड़कें खुली है लेकिन इनके बंद होने का खतरा बना हुआ है। एडीबी के ईई डीपी आर्या के अनुसार लोहाघाट-वालिक, बिल्देधार-मडलक आदि सभी सडकें खुली हुई हैं। पाटी, बाराकोट तथा लोहाघाट तहसीलों में वर्षा से वर्षा से कहीं कोई नुकसान की सूचना नहीं है। सभी स्थानो में गाड़-गधेरों का जल स्तर बढ़ गया है।