लंबे समय से बारिश न होने और भीषण गर्मी के चलते नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। पानी जुटाने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्रोतों के जल स्तर में भारी कमी आने के साथ हैंडपंपों, कुओं आदि का जल स्तर काफी नीचे चला गया है।
पेयजल की व्यवस्था में परिवार के हर उम्र के लोग जुटे रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बनी पेयजल योजनाओं के जल स्तर में 70 फीसदी कमी आ गई है, जबकि नगर के लिए बनी बनस्वाड़ पेयजल योजना सूख चुकी है जबकि फोर्ती का जलस्तर भी रसातल में आ गया है। ग्रामीण क्षेत्र की रौंतली माहरा, रायनगर चौड़ी की बनगांव, फोर्ती की पेयजल योजनाओं के जलस्रोत में पानी न होने के चलते यह योजनाएं ठप पड़ गई हैं, जबकि खूनामलक, चमदेवल आदि स्थानों की पेयजल योजनाएं सूखने की कगार पर हैं। लोहाघाट नगर के हथरंगिया, मीनाबाजार, ठाडाढुंगा, बजरंगबली, ऋषेश्वर, सार्कीटोला, लोहावती वार्डों में चौथे या पांचवें दिन जलापूर्ति की जा रही है। उसमें भी लोगों को आंशिक पानी मिल पा रहा है। नगर में गहराये पेयजल संकट को देखते हुए जल संस्थान प्रतिदिन लगातार तीन टैंकरों से मेन टेंक में जलापूर्ति कर रहा है। पुलहिंडोला में छह में से चार हैंडपंप बंद पड़े हैं, दो हैंडपंपों पर ही लोगों की पूरी निर्भरता है। अत्यधिक दबाव के चलते वह भी जवाब देने लग गए हैं। पेयजल के लिए लोगों की सुबह से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है।
1650 केएल के सापेक्ष मिल रहा है 400 केएल पानी
लोहाघाट। जलकल अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार नगर और ग्रामीण सभी स्थानों में पेयजल संकट बना हुआ है। जलस्रोतों के स्तर में भारी कमी आने के चलते पेयजल समस्या पैदा हुई है। लोहाघाट नगर की पूरी निर्भरता चौड़ी लिफ्ट योजना में टिकी हुई है। जिससे 400 केएल पानी मिल रहा है। जबकि ऋषेश्वर नलकूप से 35 केएल पानी ही मिल पा रहा है। तीन टैंकरों से प्रतिदिन 63 हजार लीटर पानी टैंकों में डाला जा रहा है। नगर की प्रतिदिन की आवश्यकता 1650 केएल की है।