चंपावत। कृषि विभाग ने प्रदेश में पांच जिलों में सूखे का संकट माना है। इसे लेकर कृषि निदेशालय ने शासन को रिपोर्ट भेजी है लेकिन इस रिपोर्ट में चंपावत जिले का नाम गायब है, जबकि कृषि विभाग की ओर से जिले में 35 प्रतिशत सूखे की रिपोर्ट भेजी गई है। कृषि निदेशालय द्वारा शासन को भेजी गई सूखाग्रस्त जिलों की रिपोर्ट में चंपावत जिले का नाम नहीं है जबकि कुमाऊं के पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, गढ़वाल मंडल में पौड़ी और रुद्रप्रयाग जिले में 33 प्रतिशत से अधिक (67097 हेक्टेयर) फसल की तबाही का जिक्र किया गया है।
मुख्य कृषि अधिकारी आरएल चंद्रवाल ने बताया कि चंपावत जिले में 10077 हेक्टेयर में से 3527 हेक्टेयर (35.0004 प्रतिशत) क्षेत्र सूखे की चपेट में आया है। इस रिपोर्ट को यहां से मुख्यालय भेजा भी गया। इसके बावजूद इस जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। सूखे से किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। इसके बावजूद जिले को सूखाग्रस्त घोषित न करने से उन्हें कई तरह से नुकसान झेलना पड़ेगा। सूखाग्रस्त घोषित करने के बाद राजस्व वसूली पर रोक लगाई जाती है लेकिन वर्तमान स्थिति में चंपावत को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा।
इस साल जाड़े में कम बारिश होने से रबी की फसल घटी है। कृषि विभाग का कहना है कि जनवरी में चार मिमी, फरवरी में 11, मार्च में शून्य, अप्रैल में नौ एमएम बारिश हुई है। यानि चार महीने में महज 24 एमएम बारिश हुई, जबकि इस अवधि में औसत बारिश 151 एमएम होनी चाहिए थी। 2015 में इन चार महीनों में 203 मिलीमीटर बारिश हुई।
चंपावत। किसानों का कहना है कि पहाड़ में गेहूं की ज्यादातर फसल बर्बाद हो गई। आलू की बुवाई पर संकट है। किसान पुष्कर सिंह, त्रिलोक, रमेश जोशी, सुरेश पांडेय, खिलानंद, नाथ सिंह आदि का कहना है कि चौतरफा मार के बावजूद जिले को सूखाग्रस्त घोषित न करना नाइंसाफी है, जबकि खेती समेत पशुचारे, पशुपालन पर भी बुरा असर पड़ा है।
चंपावत। भाजपा के जिलाध्यक्ष हिमेश कलखुड़िया ने बृहस्पतिवार को राज्यपाल को ज्ञापन भेजा। बताया कि जिले में बेहद कम बारिश हुई है। बारिश की कमी से तमाम फसलें बर्बादी के कगार पर है, इसके बावजूद चंपावत जिले को प्रदेश के पांच अन्य जिलों की तरह सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है, जो इस जिले के साथ नाइंसाफी है। पार्टी ने यहां के हालात को देखते हुए सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।