चंपावत जिला अस्पताल में पानी की कमी से सूखी टोंटी को दिखाता कर्मचारी।
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चंपावत।पानी की किल्लत का असर जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ने लगा है। बीते छह दिनों से पेयजल लाइन में पानी नहीं आने से यहां इलाज से लेकर साफ-सफाई तक में मुश्किल हो रही है। पेयजल की कमी से मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की कमी का असर शौचालय और अस्पताल की साफ-सफाई पर भी पड़ रहा है। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने जिलाधिकारी और जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को पत्र भेज पानी की आपूर्ति सुचारु करने का आग्रह किया है।
चंपावत जिला अस्पताल में सोमवार से पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। जबकि यहां रोजाना करीब तीन हजार लीटर पानी की जरूरत है। पेयजल की समस्या जिला अस्पताल और मरीजों के लिए सिरदर्द बन रही है। मरीजों की जरूरी जांच की भी परेशानी हो रही है। प्रयोगशाला में मरीजों की तमाम जांच और स्लाइड आदि बनाने में ही रोजाना औसतन 500 लीटर पानी की जरूरत होती है। प्रसव आदि कराने में भी बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा शौचालय में भी पानी की मांग अधिक रहती है। कुछ दिनों तक इधर-उधर से पानी की व्यवस्था कर काम चलाया गया, मगर अब हालत बेकाबू हो गए हैं। फोन से जानकारी देने पर समाधान नहीं होने पर अब मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. आरके जोशी ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को पत्र भेज पेयजल आपूर्ति सुचारु करने का आग्रह किया है।
इधर जल संस्थान के कनिष्ठ अभियंता किशोर पंत का कहना है कि स्रोत में पानी कम होने से लाइन में पानी कम है। साथ ही इस पेयजल लाइन से जिला अस्पताल के बनने से पूर्व से ही लीसा फैक्ट्री और गैस गोदाम को भी कनेक्शन दिया गया है। इसके चलते पानी का संकट बढ़ रहा है। अलबत्ता उनका कहना है कि टैंकर के जरिए अस्पताल में पानी की आपूर्ति करा हालात सामान्य किए जाएंगे।